मुलाकातियों की मुहर हर दिन बदल जाती है। चार मार्च को जो मुहर मुलाकातियों के हाथ पर लगाई जानी थी, उसकी जानकारी आरोपी को पहले ही हो गई थी। सोमवार को वह मुगलसराय से ट्रेन पकड़कर कोलकाता भागने की फिराक में था। इस बीच पकड़ा गया।
जेल से भागे राजू का इरादा खतरनाक था। बताया जा रहा है कि जेल से निकलने के बाद राजू दुष्कर्म पीड़िता के घर गया था। मुकदमा वापस लेने की धमकी दी थी। सोमवार को भी पीड़िता के घर के आसपास ही मंडरा रहा था। सूत्रों का कहना है कि जेल जाने से आरोपी बौखलाया है। वह कोई भी घातक कदम उठा सकता था।
बंदी राजू के फरार होने में लापरवाही उजागर होने के बाद भी जेल प्रशासन ने तेजी नहीं दिखाई। बंदी दोपहर में ही जेल से भागा था, लेकिन अफसर व कर्मचारी बेफिक्र रहे। शाम की गणना के दौरान भी किसी का ध्यान नहीं गया कि बंदी राजू कहां है। बताया जा रहा है कि जेल कर्मियों की मिलीभगत से ही राजू अपने हाथ में मुलाकातियों वाली मुहर लगवाने में और फिर बाहर निकलने में सफल रहा।
लिहाजा, जल्द ही जिला जेल के अधिकारियों से लेकर कर्मचारियों तक की जवाबदेही सुनिश्चित कर विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। जेल अधीक्षक एके सक्सेना ने जेल कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश शासन से की है।