डीआईजी ने जिला कारागार का जायजा लेने के बाद चंदौली और जौनपुर को दिए निर्देश
वाराणसी। हार्डकोर नक्सलियों और बदमाशों की अब ई पेशी होगी। इससे न सिर्फ खर्च बचेगा बल्कि अपराधियों को भागने का मौका भी नहीं मिलेगा। यह व्यवस्था बनारस में तो जारी रहेगी ही, चंदौली और जौनपुर में इसे अमल में लाया जाएगा। यह कहना है डीआईजी ए सतीश गणेश का। जिला कारागार में गुरुवार को बदमाशों की ई पेशी का जायजा लेने के बाद उन्होंने चंदौली और जौनपुर को भी ई पेशी कराने का निर्देश दिया।
डीआईजी गुरुवार को अभियोजन अधिकारियों के साथ जिला कारागार गए। वहां उन्होंने ई पेशी का जायजा लिया। पूछताछ के दौरान उन्हें बताया गया कि जनवरी माह में कारागार में 758 बंदियों को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से पेशी कराई गई। ऐसे में उन्होंने जेल अधिकारियों को यह व्यवस्था जारी रखने का निर्देश दिया। उन्होंने वीडियो कांफ्रेंसिंग को ई पेशी का नाम दिया और कहा कि इससे अपराधियों को भागने का मौका नहीं मिलेगा। पुलिस की जांच में पता चला है कि पेशी पर आने के बाद बदमाश फरार होने की फिराक में रहते हैं। इस दौरान वे धमकी भी देेते रहते हैं। इस व्यवस्था से तेल खर्च ही नहीं सुरक्षा का खर्च भी बचेगा। साथ ही लोगों को मिलने वाली धमकी में कमी आएगी। डीआईजी ने जेल में मुलाकात करने वालों पर निगरानी रखने का निर्देश दिया।
उन्होंने चंदौली के जिलाधिकारी और एसपी को पत्र लिखकर कहा है कि 17 हार्डकोर नक्सलियों की पेशी भी वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये होनी चाहिए। बता दें कि चंदौली के कई हार्डकोर नक्सली वाराणसी के जिला कारागार में भी रहते हैं। इस व्यवस्था में सिर्फ एक लैपटाप जेल में और दूसरा जिला मुख्यालय में रखना होगा। डीआईजी ने इसी प्रकार की व्यवस्था जौनपुर पुलिस और प्रशासन को करने का निर्देश दिया है। डीआईजी की मानें तो हाईकोर्ट ने प्रदेश के सात जिलों में वीडियो कांफ्रेंसिंग के तहत पेशी कराने का निर्देश दिया था।