वाराणसी। गंगा से दो सौ मीटर के दायरे में मठ, मंदिर तथा आश्रम को छोड़कर अन्य प्रकार के निर्माण पर वर्ष 1998 के बाद से रोक है। लेकिन प्राधिकरण की ओर से तमाम नक्शे पास किए गए और निर्माण कार्य भी हो गया। अब हाल ही में प्राधिकरण ने 27 जुलाई 2012 के बाद पास हुए नक्शों को निरस्त करने का आदेश जारी कर दिया। उच्चतम बाढ़ बिंदु (एचएफएल) से गंगा के दोनों तरफ 200 मीटर के दायरे में छह हजार हेक्टेयर (16000 वर्ग मीटर) क्षेत्र में कंटूर सर्वे होना है। इस दायरे में कई भवनों के आने का खतरा है।
गंगा से दो सौ मीटर के दायरे में हुए अवैध निर्माणों को लेकर कौटिल्य सोसायटी की तरफ से इलाहाबाद उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दाखिल है। गत 27 जुलाई को सुनवाई के दौरान न्यायालय ने एचएफएल से दो सौ मीटर दूरी का निर्धारण करने का निर्देश दिया था। न्यायालय के निर्देश के क्रम में राजस्व, सिंचाई व विकास प्राधिकरण के अधिकारियों की टीम ने कंटूर सर्वे कराने का निर्णय लिया था। इस बीच 3 दिसंबर को इस मामले में फिर सुनवाई होने तथा इसमें किरकिरी से बचने के लिए प्राधिकरण प्रशासन ने अवर अभियंताओं को नया आदेश जारी कर दिया। इसमें अवर अभियंताओं को 27 जुलाई के बाद पास नक्शों को चिह्नित कर निरस्त करने के लिए कहा है। अभियंताओं के यह समझ में नहीं आ रहा है कि पास नक्शों को बाढ़ के उच्चतम बिंदु के निर्धारण के बगैर निरस्त करने की कैसे प्रक्रिया शुरू की जाए।