वाराणसी। बाल रंगमंडल के सहयोग से नीपा की ओर से आयोजित दो दिनी सोलहवें अंतरराष्ट्रीय बाल नाट्य महोत्सव की शुरुआत गुरुवार को हुई। प्रेमचंद की कहानी ईदगाह के नाट्य रूपांतरण को छोड़कर अन्य कोई भी प्रस्तुति दर्शकों को बांधने में सक्षम नहीं रही। आखिरी प्रस्तुति तक हाल लगभग खाली हो गया था। वैसे भी दर्शकों की संख्या काफी कम थी।
कबीरचौरा स्थित नागरी नाटक मंडली में महोत्सव का शुभारंभ सायंकाल बतौर अतिथि कुंवर जी अग्रवाल, जवाहर लाल शास्त्री और श्यामलाकांत वर्मा ने दीप प्रज्जवलित कर किया। संयोजक सलीम राजा ने महोत्सव के महत्व पर प्रकाश डाला। फिर ईदगाह का मंचन शुरू हुआ। पात्रों के जीवंत अभिनय और मार्मिक कथानक ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा। चिमटा लेकर घर पहुंचने पर जब दादी हामिद को गले से लगाती है तो दर्शकों की आंखें नम हो गईं। हामिद के रूप में वंशिका राज का अभिनय काफी सराहनीय रहा। इसका निर्देशन किया था सलीम राजा ने। इसके बाद नेपाल की आकेड संस्था की ओर से नेपाली भाषा में एजुकेशन बाई डेथ नाटक का मंचन किया गया। भाषा की बाधा के चलते ज्यादातर लोग नाटक का कथानक ही नहीं समझ पाए। तीसरी और आखिरी प्रस्तुति कला निकेतन धनबाद की रही। संस्कृत नाटक मृच्छकटिकम् का हिंदी रूपांतरण पाप-पुण्य भी दर्शकों को कुछ खास पसंद नहीं आया। इस मौके पर नीपा की ओर से नाटक के क्षेत्र में कुंवर जी अग्रवाल, संस्कृति सेवा के क्षेत्र में जवाहर लाल शास्त्री और साहित्य के क्षेत्र में श्यामलाकांत वर्मा को लाइफ टाइम एचीवमेंट पुरस्कार से नवाजा गया। स्वागत केएम लाल और धन्यवाद ज्ञापन बीएमडी अग्रवाल ने किया।