वाराणसी। अविरल गंगा-निर्मल गंगा के लिए चलाए जा रहे अभियान को गति देने और गंगा मुक्ति महासंग्राम की रणनीति बनाने के लिए सोमवार को शंकराचार्य घाट पर आयोजित होने वाले एक दिवसीय संत सम्मेलन की तैयारियों को अंतिम रूप देते हुए जिम्मेदारियां सौंपी गईं। इस सम्मेलन में कई महामंडलेश्वर और भारी संख्या में साधु संन्यासियों का जमावड़ा होगा।
रविवार को शंकराचार्य घाट पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की अध्यक्षता में बैठक हुई, जिसमें सोमवार को होने वाले संत सम्मेलन पर चर्चा की गई। कार्यक्रम को अंतिम रूप देते हुए निर्णय लिया गया कि शंकराचार्य घाट पर होने वाले संत सम्मेलन में साधु संन्यासियों द्वारा गंगा अभियान को आगे गति दिए जाने पर विचार किया जाएगा। यह बैठक 21 मई को बेनियाबाग में होने वाली गंगा मुक्ति महासंग्राम को नई दिशा देगी। जो गंगा अभियान की गति में बेहद कारगार होगी। शाम को आयोजित हुई बैठक में यह तय हुआ कि सोमवार की शाम पांच बजे शुरू होने वाले संत सम्मेलन का दायित्व अन्नपूर्णा मंदिर के महंत रामेश्वरपुरी जी महाराज, महामंडलेश्वर संतोष दास सतुआ बाबा आश्रम, स्वामी ईश्वरानंद तीर्थ महामंत्री अखिल भारतीय दंडी स्वामी संन्यासी महासभा एवं ब्रह्मचारी ज्योतिर्मयानंद व्यवस्थापक श्रीविद्या मठ को सौंपा गया है। तपस्थल के सूत्रों के मुताबिक, संत सम्मेलन में काफी संख्या में साधु महात्माओं और साधु संन्यासियों का आगमन होगा। जो एक मंच से गंगा की अविरलता और निर्मलता के लिए केंद्र सरकार के खिलाफ जबरदस्त हुंकार भरेंगे और 21 मई को होने वाले गंगा मुक्ति महासंग्राम के लिए शंखनाद का काम करेंगे।
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स्वामी अड़गड़ानंद का संत सम्मेलन को समर्थन
वाराणसी। परमहंस आश्रम सक्तेशगढ़ चुनार के स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज ने संत सम्मेलन को अपना समर्थन देते हुए कहा कि गंगा सनातन धर्म की धरोहर और पहचान है। अब समय आ गया है कि संत महात्मा गंगा रक्षा के लिए अपनी कुर्बानी देने को तैयार रहे। रविवार को यथार्थ गीता प्रचार-प्रसार समिति की ओर से जारी बयान में स्वामी जी ने कहा कि गंगा किनारे लगाए गए सभी कल कारखानों को भी बंद कराया जाए। यह गंगा को प्रदूषित कर रहे हैं। अगर अनशनरत तपस्वियों को अपना जीवन त्यागना पड़ा तो सरकार को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे और काशी ही नहीं फिर तो पूरे भारत के संत महात्माओं की गंगा तपस्या के लिए लाइन लग जाएगी।