वाराणसी। देश में नए अधिवक्ताओं को तीन साल तक 20 हजार रुपए प्रतिमाह मानदेय और बुजुर्ग अधिवक्ताओं को पेंशन देने की योजना पर आल इंडिया बार कौंसिल प्रस्ताव तैयार कर रही है। स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आज तक समाज की व्यवस्था में अधिवक्ताओं की भूमिका अहम रही है लेकिन किसी सरकार ने अधिवक्ताओं की तरफ ध्यान देने की जरूरत नहीं समझी। हित में कोई खास पहल नहीं की। अब उनकी समस्याओं और सुविधाओं की दिशा में बार कौंसिल गंभीरता से विचार कर रही है। यह बातें आल इंडिया बार कौंसिल के चेयरमैन मन्नन मिश्र ने कहीं।
निजी यात्रा पर रविवार को वाराणसी आए बार कौंसिल के चेयरमैन श्री मिश्र ने बाबा विश्वनाथ का रुद्राभिषेक और मां अन्नपूर्णा के दर्शन करने के बाद विधि पत्रकारों से बातचीत की। कहा कि मानक की अनदेखी करने वाले निजी ला कालेजों मान्यता तत्काल रद कर दी जाएगी। इसी लापरवाही में देश में 65 ला कालेज बंद कर दिए गए हैं और 125 के खिलाफ जांच चल रही है। कहा कि देश के 17 लाख अधिवक्ताओं का प्रतिनिधित्व करने वाली बार कौंसिल आफ इंडिया उनकी सुरक्षा और बेहतरी के प्रति चिंतित है। चेयरमैन ने बताया कि अधिवक्ताओं को अपडेट करने के लिए केंद्र सरकार से हर प्रांत में लायर्स एकेडमी का गठन करने और सामूहिक बीमा लागू करने की मांग की गई है। विधि मंत्री ने हमारी मांगों पर सकारात्मक संकेत दिए हैं। उनके साथ कौंसिल के उपाध्यक्ष दिनेश पाठक, यूपी बार कौंसिल के सदस्य श्रीनाथ त्रिपाठी, राधे मोहन त्रिपाठी, सुरेश श्रीवास्तव, प्रभा शंकर मिश्र, राजेश चौबे, प्रेमशंकर पांडेय एवं कृष्ण कुमार पाजी आदि रहे।