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चौरीचौरा और छपरा पैसेंजर हादसा स्पेशल केस

Sun, 13 May 2012 12:00 PM IST
Varanasi
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वाराणसी। कैंट रेलवे स्टेशन यार्ड में एक ही स्थान पर हुई चौरीचौरा एक्सप्रेस एवं छपरा पैसेंजर दुर्घटनाएं अभी तक अबूझ पहेली बनी हुई हैं। ट्रैक से लेकर कोच के एक-एक पार्ट की जांच करने के बाद भी उत्तर और पूर्वोत्तर रेलवे के अफसर इन घटनाओं के कारण नहीं तलाश सके। उत्तर रेलवे के जीएम बीएम राजशेखर ने तो यहां तक कह दिया कि अपनी सर्विस के दौरान उन्होंने ऐसा एक्सीडेंट नहीं देखा। फिलहाल उत्तर और पूर्वोत्तर रेलवे के वरिष्ठ इंजीनियर हादसे का कारण ढूंढने में जुटे हैं।
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मीडिया से बातचीत में श्री राजशेखर ने कहा कि दो दिन के अंदर दो ट्रेनों का एक ही स्थान पर दुर्घटनाग्रस्त होना। दोनों ट्रेनों के बीच के कोचों का पटरी से उतरना सामान्य कारण नहीं है। यदि ट्रैक में प्राब्लम होती तो बीच के कोच बेपटरी नहीं होते। इंजन डैमेज ट्रैक पर पहुंचता और हादसा हो जाता। इसी प्रकार यदि कोच की समस्या होती तो दोनों ट्रेनों के बीच के कोच एक ही स्थान पर जाकर पटरी से नहीं उतरते। बेपटरी हुए तीनों कोच की ड्रिलिंग ट्राली राइट साइड में गिरी है। कोच का लोड कंट्रोल करने वाले पार्ट के साथ ही कपलिंग मूवमेंट भी ठीक मिला है। व्हील में भी कोई खराबी नजर नहीं आई है। उन्होंने कहा कि दोनों हादसों का कारण जानना चुनौती जरूर है, लेकिन जल्द पता चले जाएगा। बता दें कि शनिवार को कैंट स्टेशन के वाशिंग लाइन सिक यार्ड में पूर्वोत्तर रेलवे के जीएम केबीएल मित्तल, उत्तर रेलवे के जीएम बीएम राजशेखर, डीआरएम वाराणसी ललित कपूर, डीआरएम लखनऊ जयदीप राय दिनभर गर्मी के बीच इंजीनियरों के साथ घटना के कारण जानने के प्रयास में जुटे थे।
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