वाराणसी। गंगा तट पर मंगलवार की रात पं. संजू सहाय ने तबले पर उठान, कायदा से बनारस घराने की खूबियों का एहसास कराया। बनारसबाज के अंदाज पर काशी के संगीत प्रेमी ही नहीं सात समंदर पार से आए विदेशी मेहमान भी फिदा नजर आए। संकट मोचन फाउंडेशन की ओर से यह कार्यक्रम तुलसी घाट पर किया गया।
शास्त्रीय संगीत के तबले के बनारस घराने के प्रवर्तक रहे पं. राम सहाय के प्रपौत्र पं. संजू सहाय ने शुरुआत तीन ताल में उठान से की। इसके बाद बनारसी ठेका उन्होंने बजाया। कायदा, बांट, रेला, टुकड़ा, गत, फर्द के बाद पुरानी बंदिशों को जब उन्होंने उंगलियों की थाप से साधा तब तालियों की बौछार गूंजने लगी। लंदन से अरसा बाद काशी अपने घर आए संजू अपनों के बीच कई बार भावुक नजर आए। उनका कहना था कि घर में बजाने और आदर पाने का यह मौका हमेशा याद रहेगा। वायलिन पर लहरा पं. सुखदेव मिश्र ने दिया। इससे पहले शुरुआत हुई सारंगी, वायलिन और तबले की युगलबंदी से। पं. सुखदेव ने वायलिन पर राग वाचस्पति की अवतारणा की। सारंगी पर संगीत मिश्र और तबले पर पं. किशोर मिश्र थे। अलाप, के बाद तीन ताल में मध्य लय की गत बजाकर इन कलाकारों ने विराम लिया। संकट मोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र, विधायक रवींद्र जायसवाल ने दीप जलाया। संचालन किया गोरखपुर विश्वविद्यालय के संगीत विभाग के पूर्व डीन डॉ. राजेश्वर आचार्य ने। कलाकारों का स्वागत बीएचयू के न्यूरोलॉजी विभाग के हेड डॉ. वीएन मिश्र ने किया।