वाराणसी। हैंडलूम उत्पादों की मांग विदेशों में बढ़ रही है। निर्यात में औसतन प्रति वर्ष 15 से 20 फीसदी की दर से इजाफा हो रहा है। जबकि, मशीनमेड उत्पादों के मुकाबले हैंडलूम उत्पादों की कीमत लगभग 15 से 20 फीसदी अधिक होती है। विदेशों में हैंडलूम उत्पादों में सबसे अधिक मांग हैंगिंग कालीन, ड्रेस मैटेरियल, स्टोल-स्कार्फ, शेरवानी-कुर्ता, बनारसी साड़ी की है। निर्यात में इजाफे से निर्यातकों के साथ हैंडलूम कारोबारी भी उत्साहित हैं।
निर्यातक अमिताभ और राजीव अग्रवाल ने बताया कि हैंडलूम उत्पादों की मांग अमेरिका, मलयेशिया, दुबई, मस्कट और कनाडा आदि देशों में अधिक है। अमेरिका और लंदन में सबसे ज्यादा मांग हैंडलूम कपड़े के बने शेरवानी और कुर्ते की है। यहां के स्टोल-स्कार्फ भी विदेशों में खूब पसंद किए जा रहे हैं। फिलहाल वाराणसी के हैंडलूम उत्पादों का निर्यात लगभग सौ करोड़ रुपये का है। निर्यात किए जाने वाले उत्पादों में कालीन, दरी, बनारसी वस्त्र, साड़ियां, ब्रोकेड, ड्रेस मैटेरियल आदि शामिल हैं। यहां से सीधे निर्यात करने वाले गिने चुने लोग हैं। दिल्ली, मुंबई और बंगलूरू के कारोबारी यहां से उत्पाद खरीद कर ले जाते हैं और वहां से निर्यात करते हैं।
छह दिन में 37 लाख का कारोबार
वाराणसी। नाटी इमली स्थित भरत मिलाप मैदान में आयोजित पंद्रह दिवसीय स्पेशल हैंडलूम एक्सपो के शुरुआती छह दिनों में लगभग 37 लाख रुपये का कारोबार हुआ है। दोपहर एक बजे से रात आठ बजे तक खुला रहने वाला यह एक्सपो 10 जनवरी तक चलेगा।
विकास आयुक्त (हथकरघा) वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार की तरफ से प्रायोजित और हथकरघा एवं वस्त्रोद्योेग विभाग उत्तर प्रदेश इस एक्सपो में वाराणसी समेत बिजनौर, कानपुर, मऊ, बांदा, झांसी, मिर्जापुर, इटावा, मेरठ, गोरखपुर, रामपुर, मुरादाबाद की सहकारी समितियों की तरफ से स्टाल लगाए गए हैं। उत्तर प्रदेश राज्य हथकरघा निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक अनिल सिंह ने बताया कि बांदा की दरी की सबसे अधिक खरीदारी हो रही है। इसके रामपुर की बनी रजाइयां, हरिद्वार के बने ऊलेन साल, कंबल, गोरखपुर की बेडशीट आदि की भी अच्छी मांग है। बिहार तक से ग्राहक यहां एक्सपो में आकर खरीदारी कर रहे हैं।