राम रमापति बैंक की सांकेतिक फोटो
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काशी में अपने तरह के अनूठे श्रीराम रमापति बैंक में प्रतिवर्ष राम नाम जमा करने वाले भक्तों को इस वर्ष निराशा का सामना करना पड़ा। वाराणसी नगर के मानमंदिर मोहल्ले में स्थित इस बैंक में प्रतिवर्ष सैकड़ों लोग राम नाम जमा करते हैं। प्रतिवर्ष रामनवमी के दिन यहां विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं। बैंक में अब तक जमा हा चुके 19 अरब, 34 करोड़ 56 लाख 75 हजार राम नाम की परिक्रमा की जाती है, लेकिन इस वर्ष राम रमापति बैंक के संस्थापक परिवार के सदस्यों ने ही पूजन-अर्चन किया।
भगवान की जन्म झांकी में सजाए जाने वाले खिलौनों का बच्चों में वितरण किया जाता है, लेकिन इस बार प्रतीक रूप में तीन-चार खिलौने ही झांकी में सजाए गए। रामनवमी की तिथि पर ही नए खाताधारकों को राम नाम लिखने के लिए किरमिच की कलम, लाल स्याही और श्वेत कागज प्रदान किए जाते थे। व्रत लेकर पूरे वर्ष लिखे गए राम नाम रामनवमी के दिन ही बैंक में जमा किए जाते हैं। इस वर्ष यह परंपरा भी नहीं निभाई जा सकी।
बैंक के प्रबंधक दास कृष्णचंद ने बताया कि अब से 93 वर्ष पूर्व उनके परदादा ने इस बैंक की स्थापना की थी। उन्हें एक संत ने इस बैंक की स्थापना करने का निर्देश दिया था। उस वक्त उनका परिवार पांच कमरों वाले एक भवन में ही रहता था। उनके परदादा ने संत से प्रश्न किया कि शुरु में तो वह अपने भवन के दो कमरों में राम नाम संगह करने की व्यवस्था कर लेंगे लेकिन भविष्य में क्या करेंगे। तब संत का कहना था कि तुम राम नाम का संग्रह आरंभ करो बाकी सब राम देख लेंगे। आश्चर्य की बात है कि अब उस भवन से सटे तीन अन्य भवन भी बैंक का हिस्सा बन चुके हैं। इन्हीं भवनों में राम नाम का संग्रह किया जाता है।