वाराणसी। टेक्सटाइल इंडस्ट्री के उद्यमियों को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने सख्त हिदायत दी है कि वे औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले अपने प्रदूषित पानी की मात्रा में कमी लाएं। प्रदूषण युक्त पानी का शोधन करने के साथ-साथ, समय-समय पर विशेषज्ञों के जरिए इसकी जांच भी कराते रहे। यह सारा काम उद्यमियों को अपने खर्चे पर करना है। इसमें कोई रियायत नहीं दी जाएगी।
शुक्रवार को आईआईए पनकी के सभागार में भदोही, बनारस, फर्रुखाबाद, मेरठ हापुड़, ट्रोनिका सिटी गाजियाबाद के साथ कानपुर के टेक्सटाइल इंडस्ट्री से जुड़े उद्यमियों को सीपीसीबी की तरफ से आमंत्रित किया गया था। सीपीसीबी के अतिरिक्त निदेशक एके विद्यार्थी ने कहा कि औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले प्रदूषित कचरे का समाधान खुद उद्यमियों को ही करना होगा, वह भी अपने खर्चे पर। इकाइयों में जो भी प्रदूषण नियंत्रण संयंत्र लगे हैं, उनकी मॉनीटरिंग तो होगी, साथ में आईआईटी, एचबीटीयू, यूपी टेक्सटाइल इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञों के जरिए समय-समय पर इसकी जांच भी कराते रहे। सीपीसीबी की तरफ से प्रदूषण रोकने संबंधी सीपीसीबी के आदेश से जुड़ी एक बुकलेट भी उद्यमियों को दी गई है। कहा गया कि इसका अध्ययन कर इसमें लिखी गई बातों का अनुसरण करना सभी के लिए जरूरी है। बैठक के तुरंत बाद वहां मौजूद उद्यमियों में से अधिकांश ने इसका विरोध कर दिया। उद्यमियों का कहना है कि टेक्सटाइल इंडस्ट्री की इकाइयां बहुत छोटी होती हैं। सीपीसीबी उन पर शुगर और पेपर एंड पल्प इंडस्ट्री के नियमों को लागू कर रही है जबकि शुगर और पेपर एंड पल्प इंडस्ट्री बड़ी इकाइयों के दायरे में आती हैं। पीआईए के प्रदेश अध्यक्ष मनोज बंका का कहना है कि टेक्सटाइल इंडस्ट्री पर जानबूझकर दबाव बनाया जा रहा है। इस मौके पर गोपाल शर्मा, जयप्रकाश कुशवाहा, अनुराग कुकरेजा, राहुल बासोतिया, निखिल जैन, दिनेश शाक्य सहित अनेक उद्यमी मौजूद थे। सीपीसीबी की तरफ से आईआईटी बीएचयू के प्रो एएन उपाध्याय, पीके मिश्रा, कारपेट एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के चेयरमैन संजय कुमार भी आए थे।