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यूक्रेन में बढ़ी वेद-पुराण पढ़ने की ललक

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वाराणसी। आज हमारे देश में जहां नौकरी, उद्योग या पर्यटन के लिए हर कोई अपने बच्चों को अंग्रेजी पढ़ाने पर जोर दे रहा है, वहीं वेद-पुराण, उपनिषद का मर्म जानने के लिए सात समंदर पार से लोग संस्कृत सीखने काशी आ रहे हैं। इन दिनों यूक्रेन के युवक-युवतियों का दल शिवाला में संस्कृत भाषा का अध्ययन कर रहा है। इनमें प्रबंधन से लेकर रियल स्टेट के कारोबारी, चिकित्सक और शिक्षक शामिल हैं। वह वेद-पुराणों का अपनी भाषा में अनुवाद करना चाहते हैं, ताकि उनके देश के लोग भारतीय ज्ञान-दर्शन से परिचित हो सकें।
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शिवाला स्थित वाग्योग चेतना पीठं में इन दिनों यूक्रेन के 14 युवक-युवतियां संस्कृत सीख रहे हैं। वाग्योग प्रणाली के विद्वान प्रो. भगीरथ प्रसाद त्रिपाठी वागीश शास्त्री उन्हें देव भाषा सिखा रहे हैं। कुछ दिनों में ही यूक्रेनी युवाओं ने संस्कृत में वाक्यों का उच्चारण और लेखन शुरू कर दिया है। प्रो. त्रिपाठी बताते हैं कि वेद-पुराणों के अध्ययन के लिए विदेशी संस्कृत सीखना चाहते हैं। उन्होंने ऐसी विधि तैयार की है, जिसके जरिए बिना रटे सिर्फ 180 घंटे में कोई भी संस्कृत भाषा सीख सकता है।
संस्कृत सीख रहीं योग फेडरेशन की सदस्य केसनिया ने बताया कि वह पिछले वर्ष रूस में रहकर किताबों के माध्यम से संस्कृत सीख रही थीं लेकिन बहुत कामयाब नहीं हो सकीं। अब यहां आकर कम समय में ही संस्कृत की समझ विकसित होने लगी है। वहीं, नाडिया का कहना है कि इस विधि से संस्कृत सीखने में बहुत आसानी हो रही है। अब वह मंत्रों का भी उच्चारण करने लगी हैं। मारिया ने बताया कि योग प्रशिक्षक आंद्रेय के कहने पर वह संस्कृत सीखने के लिए बनारस आईं हैं। अब संस्कृत के शब्दों को समझने लगी हैं। आने वाले समय में वह योग, दर्शन की पुस्तकों का अनुवाद करेंगी। इसी तरह वितालिया गुलेन्को, ओल तच्छको, विताली कोसलटी ने बताया कि वेद-वेदांग को जानने के लिए संस्कृत सीखना चाहती हैं।
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