वाराणसी। आठवीं मुहर्रम शुक्रवार को शहर भर में शहीद-ए-करबला इमाम हुसैन के अलमबरदार जनाबे अब्बास की याद में मजलिस, मातम संग जुलूस उठाए गए। अर्दली बाजार, शिवाला, चौहट्टा लाल खां, दालमंडी समेत कई इलाकों में अलम, ताबूत और दुलदुल के जुलूस उठाए गए। अंजुमनों ने शहनाई की धुन पर नौहा मातम करते हुए जनाबे अब्बास को खिराजे अकीदत पेश की।
अर्दली बाजार में जियारत हुसैन के निवास पर अलम और दुलदुल का जुलूस उठाया गया। अंजुमन इमामिया के अजादारों ने नौहा और मातम किया। संयोजन इरशाद हुसैन का रहा। शिवाला और दुर्गाकुंड में अलम दुलदुल और ताबूत के जुलूस उठाए। वहीं, चौहट्टा लाल खां में ताबूत का जुलूस उठाया गया तो रास्ते में अंधेरा कर दिया गया। यह मखसूस जुलूस अंधेरे में ही उठाया जाता है। इसी तरह चाहमामा, दालमंडी स्थित शेख नब्बू के निवास से ताबूत और अलम का जुलूस उठाया गया। यहां शराफत अली ने मर्सियाख्वानी करते हुए पढ़ा कि ‘जब हाथ कलम हो गए सक्का-ए-हरम के, अब्बास तुझे वफा याद करेंगे...’। इस जुलूस में शहनाई पर मातमी धुन के साथ आंसुओं का नजराना पेश किया गया। हकीम मोहम्मद काजिम, डॉ. नाजिम जाफरी, मैकश गाजीपुरी, आफाक हैदर, दिलकश गाजीपुरी, अर्शी जौनपुरी के नौहा पेश किए गए।
इसी तरह शिवाला में बाराती बेगम के इमामबाड़े से दुलदुल का जुलूस उठाया गया, जो कुम्हार के इमामबाड़ा हरिश्चंद्र घाट पहुंचकर खत्म हुआ। रास्ते में कई जगहों पर सबील लगाकर शरबत, पानी और चाय से अजादारों का इस्तकबाल किया गया। वहीं, काली महल में गंगा जमुनी तहजीब का नजारा देखने को मिला। यहां हुसैन और इंसानियत आर्गेनाइजेशन के सदस्यों ने सबील लगाकर दुर्गा पूजा के दर्शनार्थियों की प्यास बुझाई। अंजुमन आबिदिया, गुलजारे अब्बासिया, कासिमिया अब्बास आदि ने नौहाख्वानी व मातम किया। उधर, घरों में जनाबे अब्बास के नाम पर फातिहा दिलाई गई।