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मौनी अमावस्या से पहले डेटोनेटर मिलने से हड़कंप

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वाराणसी। डेटोनेटर, जिलेटिन रॉड और अमोनियम नाइट्रेट जिले में हाल में बरामद नहीं किए गए हैं। मौनी अमावस्या और 19 फरवरी को रविदास जयंती पर सीर गोवर्धनपुर में उमड़ने वाली भीड़ की तैयारियों के बीच लौटूबीर मंदिर के पास डेटोनेटर मिलने से हड़कंप मच गया। खुफिया एजेंसियां चौकन्नी हुईं और एलआईयू सहित अन्य इकाइयों के अधिकारियों ने सीर गोवर्धनपुर और लंका थाने पहुंच कर पुलिस से जानकारी ली।
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डेटोनेटर किस उद्देश्य से कार्टन में रखे गए, इसका पता लगाने में लंका थाने की पुलिस और क्राइम ब्रांच के साथ खुफिया एजेंसियां भी जुट गई हैं। ऐसी विस्फोटक सामग्री के लिए वाराणसी जोन के मिर्जापुर और सोनभद्र सुर्खियों में रहते हैं। रविवार को डेटोनेटर मिले तो चौबेपुर के पिता-पुत्र की हत्या चर्चा में आ गई। 28 अगस्त 2018 की आधी रात के बाद चौबेपुर थाना के मिल्कोपुर गांव में दो धमाके कर खली चूनी व्यापारी लालजी यादव और अजय की हत्या कर दी गई थी। आगरा की फोरेंसिक लैब की रिपोर्ट आई तो पता लगा कि धमाका करने के लिए अमोनियम नाइट्रेट का इस्तेमाल किया गया था। दोहरे हत्याकांड के सूत्रधार, लखरांव गौराकला के सोनू यादव सहित तीन को गिरफ्तार कर पुलिस ने कॉपर का तार, बैटरी और इलेक्ट्रिक फ्यूज बरामद किया था। इसके अलावा हाल के वर्षों में विस्फोटक सामग्रियों का इस्तेमाल कर किसी वारदात को अंजाम नहीं दिया गया।
हैंडग्रेनेड राज अब भी बरकरार
आतंकी हमले का दंश झेल चुकी दीवानी कचहरी परिसर में अप्रैल, 2016 में हैंडग्रेनेड बरामद हुआ था। यह हैंडग्रेनेड कहां से आया था, कौन और क्यों लाया था, इसकी गुत्थी आज तक नहीं सुलझ सकी है।
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क्या होता है डेटोनेटर
डेटोनेटर की मदद से बम को सक्रिय किया जाता है। सामान्य भाषा में इसे बम का ट्रिगर भी कह सकते हैं। इसका इस्तेमाल गड्ढा खोदकर छुपाए गए बमों आईईडी (इंप्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइसेस) में किया जाता है। नक्सली आमतौर पर ऐसे ही बमों का उपयोग करते हैं।
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