वाराणसी। कॉलेजों में यूपी बोर्ड इंटर परीक्षा की प्रायोगिक परीक्षाओं को लेकर शिक्षा विभाग की ओर से पारदर्शिता, गुणवत्ता को लेकर दावे तो खूब किए गए, लेकिन हकीकत कुछ और ही है। इंटर कॉलेजों की प्रयोगशाला में जहां एक ओर छात्रों को पास-पास बिठाकर प्रायोगिक परीक्षा कराई जा रही है, वहीं अधिकांश केंद्रों पर पुराने जंग लगे उपकरणों का प्रयोग हो रहा है।
जिले में 30 दिसंबर से 13 जनवरी तक प्रायोगिक परीक्षा होनी है। करीब 100 से अधिक ऐसे कॉलेज हैं, जहां इंटर विज्ञान वर्ग का प्रैक्टिकल होना है। इसमें नियमानुसार प्रयोगशाला में वायस रिकार्डर युक्त सीसीटीवी लगाए जाने के साथ ही प्रैक्टिकल की वीडियोग्राफी कराए जाने का आदेश भी जारी किया गया था, लेकिन सोमवार को जिले के कई विद्यालयों में इस आदेश का पालन नहीं दिखा। सबसे खराब स्थिति तो ग्रामीण क्षेत्र के कॉलेजों की है, यहां भी पुराने उपकरणों के सहारे ही प्रायोगात्मक परीक्षा चल रही है। शहर के बीच स्थित एक इंटर कॉलेज के प्रयोगशाला में तो छात्र ऐसे बैठे मिले जैसे उनका बोर्ड प्रैक्टिकल नहीं बल्कि क्लास चल रही हो। चेतगंज स्थित एक इंटर कॉलेज के प्रयोगशाला में तो जंग लगे उपकरण के सहारे ही परीक्षार्थी परीक्षा देते नजर आए। ऐसा लग रहा था जैसे कि लंबे समय से यहां सफाई नहीं कराई गई थी।
परीक्षार्थियों से ली जाती है फीस
कॉलेजों में प्रैक्टिकल के मद में छात्र-छात्राओं से फीस भी ली जाती है, बावजूद इसके सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। इसमें कुछ जगहों पर तो प्रवेश के समय ये फीस लगता है, तो कुछ जगहों पर प्रैक्टिकल के पहले लिया जाता है। अगर इस मद का भी उपयोग किया जाए तो व्यवस्था में सुधार हो सकता है और इसका लाभ परीक्षार्थियों को मिलेगा। सारनाथ संवाददाता के अनुसार बीएस कान्वेंट विद्यालय में भी वर्ष 2009 के उपकरण लगे मिले। यहां छात्रों ने प्रायोगात्मक परीक्षा मद में 200 रुपये लिए जाने का आरोप लगाया। जबकि प्रधानाचार्य अरुण कुमार सिंह ने पूछे जाने पर बताया कि प्रायोगात्मक परीक्षा में उपयोग होने वाले उपकरणों को खरीदने के लिए ही शुल्क लिया जाता है।