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संगठनों ने भी दिखाई एकजुटता

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वाराणसी। साथी कर्मचारी के साथ जीआरपी सिपाहियों द्वारा मारपीट से महिला रेलवे महिला कर्मी भी आक्रोशित थीं। उन्होनें भी एकजुट होकर विरोध जताया। रेलकर्मचारी संगठनों ने इस प्रदर्शन में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। हर संगठन कर्मचारियों की आवाज को पुरजोर तरीके से उठाने वाला साबित करने में जुटा था। संगठनाें के एक साथ पहुंचने की वजह से दबाव बनाने में रेलवे कर्मचारी कामयाब रहे।
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गुरुवार की सुबह आठ बजे विभिन्न संगठनों के नेताओं के साथ ही रेल कर्मचारियों ने जीआरपी चौकी का घेराव शुरू कर दिया और कार्रवाई की मांग करने लगे। सुनवाई न होने पर लगभग 10:15 बजे रेलकर्मचारी मंडुवाडीह थ्रीए क्रासिंग पर पहुंच गए और ट्रैक पर बैठ गए। इसमें बड़ी संख्या में महिला कर्मचारी भी रहीं। जीआरपी के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। मौके पर जीआरपी, आरपीएफ और सिविल पुलिस पहुंच गई। कर्मचारी मौके पर वरिष्ठ अधिकारियों को बुलाने के साथ सिपाहियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे थे।
ट्रेनों का परिचालन प्रभावित होनेे और क्रासिंग पर आवागमन बंद होने की वजह से कर्मचारियों को समझा बुझाकर वहां से हटाया गया। लगभग 11:15 बजे कर्मचारी फिर से जीआरपी चौकी का घेराव करने पहुंच गए। मौके पर पहुंचे जीआरपी सीओ विमल कुमार श्रीवास्तव ने शिकायत सुनने और लिखित तहरीर लेने के बाद दो सिपाहियों प्रकाश और अनिल को लाइन हाजिर कर दिया। साथ ही, जांच के बाद कठोर कार्रवाई का आश्वासन दिया। इतना ही नहीं, जीआरपी और आरपीएफ के वरिष्ठ अधिकारी घायल कर्मचारी को देखने पहुंचे। दोपहर लगभग एक बजे प्रदर्शन शांत हुआ। इस मौके पर एनई रेलवे मेंस कांग्रेस के अध्यक्ष अखिलेश पांडेय, पूर्वोत्तर रेलवे श्रमिक संघ के महामंत्री विशेश्वर राय, एनबी सिंह, रमेश मिश्रा, अजय श्रीवास्तव, दुर्गेश कुमार सहित तमाम कर्मचारी नेता व कर्मचारी मौजूद रहे।
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