वाराणसी। बड़ा लालपुर स्थित जीवनदीप शिक्षण संस्थान में दो दिवसीय विश्व भोजपुरी सम्मेलन अंजोर का आयोजन किया गया। इसमें प्रधानमंत्री द्वार कराए गए प्रवासी भारतीय सम्मेलन की सराहना की गई।
कार्यक्रम का शुभारंभ मारीशस के उच्चायुक्त गोवर्धन ने दीप प्रज्जवलित करके किया। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी मातृ भाषा से दूर होती जा रही है। ये गंभीर समस्या है। इसके लिए विशेषकर भोजपुरी के प्रति जागरूक करने की आवश्यकता है, जिससे आने वाली पीढ़ी अपनी मातृ भाषा को याद रखे। भोजपुरी सम्मेलन के महासचिव डॉ. अशोक कुमार सिंह ने कहा कि मारीशस में आज भी भेजपुरी को द्वितीय राजभाषा का दर्जा मिला हुआ है, लेकिन यहां बड़ी संख्या में भोजपुरी भाषी होने के बाद कोई दर्जा प्राप्त नहीं है। जबकि इस भाषा से हम लोगों की पहचान जुड़ी है। पिंडरा विधायक डॉ. अवधेश सिंह ने कहा कि भोजपुरी के विकास के लिए काशी विद्यापीठ में भोजपुरी अध्ययन केन्द्र खोलने का प्रस्ताव पूर्र्व कुलपति को दिया गया था, लेकिन उनके जाते ही पूरा मामला ठंडे बस्ते में चला गया। कहा कि कितनी विडंबना है कि अपनी मातृ भाषा के लिए सम्मेलन आयोजित करना पड़ रहा है। बीएचयू भोजपुरी अध्ययन केन्द्र के समन्वयक श्री प्रकाश शुक्ल ने कहा कि भोजपुरी के सांस्कृति भाषा है। जिसमें एक तरफ श्रम बोलता है, दूसरी तरफ संघर्ष। इसमें परिवेश की पहचान और परिवर्तन के सरोकार मौजूद हैं। इस मौके पर प्रो सुरेन्द्र सिंह, अजित दुबे, जयकांत सिंह, उॉ. अशोक कुमार सिंह सहित बड़ी ंसख्या में भोजपुरी के वक्ता उपस्थित रहे।