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पहले कराया झाड़ फूंक, अब करा रहे इलाज

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वाराणसी। मानसिक बीमारियों पर नियंत्रण के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से दुआ से दवा तक अभियान की शुरूआत गुरुवार से हो गई। इसके तहत कैंट स्थित हजरत बाबा बहादुर शहीद मजार विशेष शिविर लगाया गया, जहां 70 लोगों की काउंसिलिंग की गई, जो इलाज के लिए तैयार हो गए। वहीं शिविर में पहुंचे 22 लोगों का इलाज किया गया।
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स्वास्थ्य विभाग की ओर से चलाए जा रहे इस अभियान के तहत मानसिक बीमारियों पर नियंत्रण के लिए धर्मगुरुओं की सहमति से मंदिरों, मस्जिदों सहित अन्य धार्मिक स्थलों पर स्वास्थ्य शिविर लगाने का निर्णय लिया गया था। इसमें लोगों को झाड़-फूंक के बजाय स्वास्थ्य सुविधाओं के माध्यम से इस बीमारी का इलाज कराने के लिए प्रेरित करने की बात कही गई थी। गुरुवार को लगे शिविर में शिविर में 38 लोगों ने अपना पंजीकरण कराया, जिनमें 22 लोगों की दवा शुरू कर दी गई, जबकि बाकी 16 लोगों को मंडलीय अस्पताल बुलाया गया है। यहां जांच के बाद उनका भी इलाज शुरू किया जाएगा।
मनोचिकित्सक डॉ. रवींद्र कुशवाहा ने बताया कि जिन लोगों का इलाज शुरू किया गया है, उनमें अधिकतर साइकोसिस, डिसोसिएशन (हिस्टीरिया), मिर्गी और एनजाईटी के कारण परेशान थे और लोगों के बहकावे में आकर लंबे समय से झाड-फूंक और भूत-प्रेत के चक्कर में पड़े थे। इसके अलावा दरगाह पर झाड़-फूंक के उद्देश्य से आए करीब 70 लोगों ने अपना पंजीकरण कराकर अपनी समस्या बताई, जिसे चिकित्सकों ने दूर करने की बात कही। ऐसे लोग जो इस बात पर तैयार थे कि वे झाड़-फूंक के साथ इलाज भी कराएंगे, उन्हें मंडलीय अस्पताल बुलाया गया। इस दौरान साइको सोशल वर्कर इला त्रिपाठी और अमृता त्रिपाठी आदि लोग मौजूद रहे।
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