ज्ञानपुर। काशी नरेश राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में शनिवार को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और सिफ्शा की ओर से जिला स्तरीय प्रधान सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें प्रधानों को गांव के विकास की अहम कड़ी बताया गया।
जिलाधिकारी विशाख जी ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि गांव का बेहतर विकास तभी संभव है, जब वहां का प्रधान और ग्रामीण मिल-जुलकर काम करें। ग्राम प्रधानों से कहा कि अपने-अपने ग्राम पंचायतों में स्थापित स्कूल, एएनएम सेंटर, आंगनबाड़ी केंद्रों में कम से कम एक सेंटर को अवश्य मॉडल के रूप में विकसित करें, जिससे ग्राम पंचायत की पहचान कायम हो। जिले को स्वच्छ और सुंदर बनाने में अपनी भागीदारी निभाएं। कहा कि अपनी-अपनी ग्राम पंचायत से कुपोषण बीमारी को दूर भगाएं। गांवों में धन उपलब्धता के बाद भी विकास कार्य न होना गंभीर विषय है। हैंडपंपों का रजिस्टर बना लें। उनकी भी स्थिति लिखें, जो खराब हैं। डीएम ने कहा कि विकास खंड डीघ और अभोली की 88 ग्राम पंचायतों को खुले में शौचमुक्त करने के लिए छह से 19 मार्च तक निर्माण दिवस मनाया जाएगा। सक्रिय टीबी रोगी खोज अभियान 24 फरवरी से 10 मार्च तक स्वास्थ्यकर्मी अपनी टीम के साथ घर-घर जाकर चिन्हांकन करें। कहा कि राज्य वित्त एवं चौदहवां वित्त से सरकारी संपत्तियों के रखरखाव में कार्ययोजना बनाकर धनराशि व्यय करें। सीडीओ हरिशंकर सिंह ने कहा कि विकास गांव से शुरू होता है, प्रधान ग्राम का प्रथम नागरिक एवं जनप्रतिनिधि होता है। गांव के सभी पहलुओं से निजात दिलाना ग्राम प्रधान का दायित्व होता है। कार्यकम का संचालन डीपीएम सत्यप्रकाश ने किया। इस मौके पर सीएमओ डॉ. सतीश सिंह, डीपीआरओ अनिल कुमार त्रिपाठी, बृजेश, प्रधानसंघ अध्यक्ष राजेंद्र मिश्र शंकराचारी आदि रहे।