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शरद पूर्णिमा के चांद ने की अमृत वर्षा

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वाराणसी। शरद पुनवासी की चांदनी गुरुवार की रात चहुंदिश उजियारा कर गई। पूनम चांद की दूधिया चमक मुट्ठी में भर लेने की कसक हर दिल में थी। पूर्णिमा का चांद प्यार की तरह उगा।16 कलाओं से युक्त चांद का दीदार करने के लिए लोग गंगा तटों से लेकर छतों पर तक थे। मान्यता है कि इस रात ओस कणों से अमृत वर्षा होती है। इसलिए शाम को त्रिपुरसुंदरी महाविद्या बाला, राज राजेश्वरी के अलावा महालक्ष्मी की सविधि पूजा के बाद छतों पर खीर से भरी थालियां सजाई गईं। निरोगी काया के लिए इस खीर को प्रसाद के रूप में परोसा गया। रवींद्रपुरी स्थित वेद पारायण केंद्रम में महाविद्या की पूजा सविधि मंत्रोच्चार के साथ आरंभ हुई। काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद के अध्यक्ष आचार्य पं. अशोक द्विवेदी की मौजूदगी में वैदिक आचार्यों ने ललिता सहस्रनाम का सस्वर पाठ किया। इस दौरान रात 10 बजे तक महाविद्या के दर्शन हुए। मणिकर्णिका घाट स्थित त्रिपुर सुंदरी विद्याबाला की विशेष आराधना की गई। चांदनी रात में सूई में धागा पिरोने की रस्में भी निभाई गईं। कोजागरी पर बंगीय समाज में घर-घर लक्ष्मी के आगमन पर दीप जलाकर जागरण किया गया। रात भर खिड़की, दरवाजे खुले रखे गए।
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कीनाराम आश्रम-गड़वा घाट में श्वास की दवा का वितरण
वाराणसी। गड़वा घाट आश्रम में शरद पूर्णिमा पर श्वास की दवा का वितरण किया गया। दूर-दराज से सैकड़ों की तादाद में लोग दवा लेने के लिए पहुंचे। इसके लिए लंबी कतार लगी रही। गुरु शरणानंद महाराज ने दवा वितरित की। उधर, रवींद्रपुरी स्थित अघोरपीठ कीनाराम आश्रम में बाबा सिद्धार्थ गौतम राम ने भी श्रद्धालुओं को दमा की दवा का वितरण किया।
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