वाराणसी। कुछ विभाग हैं जो बजट का रोना रोते हैं तो कई ऐसे हैं जो बजट रहते हुए भी, उसे खर्च नहीं कर पाते। जिले में ऐसे कई अधिकारी हैं, जो जनकल्याण और विकास कार्यक्रमों के लिए मिली करोड़ों की रकम दबाकर बैठे हैं। जबकि, वित्तीय वर्ष समाप्त होने में महज दो महीने बाकी रह गए हैं। मार्च तक धनराशि का सदुपयोग न होने पर बजट लैप्स हो जाएगा। सबसे खराब हालत मुख्य विकास अधिकारी के नाम जारी होने वाले फंड की है। चालू वित्तीय वर्ष में शासन ने उन्हें एक करोड़ 84 लाख 65 हजार का बजट दिया था। वह 31 जनवरी तक इसमें से 17.11 प्रतिशत धनराशि ही खर्च कर पाए हैं।
इस बजट के तहत 31 हजार 60 हजार रुपये खादी एवं ग्रामोद्योग पर खर्च होने थे, जिसे पूरा कर लिया गया लेकिन सोशल वेलफेयर के लिए निर्धारित एक करोड़ 53 लाख चार हजार रुपये की रकम अब तक खर्च नहीं की जा सकी है। वहीं जनकल्याण और विकास कार्यक्रमों के लिए जारी होने वाले डीएम के तीन फंड की बात की जाए तो एक को छोड़ बाकी दो की हालत भी कमोबेश ऐसी ही है। एक फंड में 75 लाख 23 हजार 414 रुपये के सापेक्ष महज 5.32 प्रतिशत रकम खर्च हुई है। इसमें सामान्य प्रशासन के लिए सौ प्रतिशत राशि खर्च की गई जबकि शहरी विकास के मद के लिए मौजूद 71 लाख 23 हजार 414 रुपये में से कोई राशि खर्च नहीं हो सकी। वहीं दूसरे फंड की 71.23 रकम को अब तक उपयोग में लाया गया है। डीएम द्वारा नामित अधिकारी के जरिए संचालित होने वाले तीसरे फंड से 90.81 प्रतिशत राशि खर्च की जा चुकी है।
चालू वित्तीय वर्ष 31 मार्च को खत्म हो जाएगा और इसी के साथ ही विभिन्न विभागों के खाते में मौजूद धनराशि भी शासन को वापस चली जाएगी। बावजूद इसके कई विभाग अब तक पचास फीसदी रकम भी खर्च नहीं कर पाए हैं। बुनियादी जरूरतों और सुविधाओं के लिए किसान परेशान हैं लेकिन कृषि विभाग 70 प्रतिशत रकम भी खर्च नहीं कर पाया है। उप कृषि निदेशक को शासन ने 29 करोड़ 64 हजार सात सौ रुपय बजट आवंटित किए हैं। शुक्रवार तक विभाग 65.70 प्रतिशत राशि ही खर्च कर पाया है। वाराणसी को चालू वित्तीय साल में 76 अरब, 16 करोड़ 40 लाख 46 हजार 323 रुपये का बजट था जिसके सापेक्ष 59 अरब 82 करोड़ 75 लाख 72 हजार 934 रुपये खर्च हो पाए हैं।