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दुनिया देखेगी हमारी कालीन की खूबसूरती

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वाराणसी। भदोही और बनारस में तैयार कालीन देश-दुनिया में अपनी पहचान बना चुकी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कालीन मजबूती देने के उद्देश्य से सरकार विशेष प्रयास कर रही है। इसी के तहत दीनदयाल हस्तकला संकुल में कालीन के आकर्षक नमूने प्रदर्शित किए गए हैं, जो यहां आने वाले आयातकों और पर्यटकों का ध्यान बरबस अपनी तरफ खींच लेते हैं।
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भदोही को कालीन का हब माना जाता है। हालांकि बुनाई और निर्यात का बड़ा केंद्र बनारस भी बन चुका है। भदोही, वाराणसी, मिर्जापुर में कालीन और दरी बनाने की परंपरा मुगलकाल से चली आ रही हैै। प्राकृतिक रंगों से हाथ से बनी कालीन की भारत की अपेक्षा दूसरे देशों में मांग ज्यादा है। दुनिया में सबसे अधिक हस्तनिर्मित कालीन भदोही से भेजी जाती है। यहां इस कारोबार में करीब 10 लाख लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं। लगभग आठ हजार करोड़ वाले इस पारंपरिक हस्तशिल्प को भारत की बौद्धिक संपदा अधिकार का दर्जा मिल चुका है। देश में सभी जीआई उत्पादों में यह शिल्पियों की संख्या एवं निर्यात के आधार पर सबसे बड़ा उत्पाद है। प्राचीन और आधुनिक डिजाइनों में तैयार यहां के कालीन की विश्व बाजार में खासी डिमांड हो रही है। कालीन नगरी के नाम से विख्यात भदोही और आसपास के नौ जनपदों को इस क्राफ्ट के लिए पंजीकृत किया गया है।
संकुल में मैनुअल और डिजिटल डिस्प्ले
- हस्तकला संकुल में भदोही की कालीन का डिस्प्ले बहुत आकर्षक तरीके से किया गया है। यहां मैनुअल और डिजिटल दो माध्यमों से कालीन प्रदर्शित की गई है। इसके अलावा कालीन बनाने की कला का भी प्रदर्शन किया जाता है।
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नॉटेड कार्पेट की दुनिया दीवानी
- नाटेड कार्पेट मूल रूप से भदोही की कालीन के रूप में प्रसिद्ध रही है लेकिन समय के साथ टफ्टेड, नेपली और सैगी कार्पेट का चलन भी तेजी से बढ़ा है। अब जूट, सिल्क, सिंथेटिक यार्न और काटन का प्रयोग भी कालीन बनाने तेजी से किया जा रहा है।
जीआई पंजीकरण से जगी उम्मीद
- वर्ष 2010 में जीआई पंजीकरण के बाद भदोही की हस्तनिर्मित कालीन को देश की बौद्धिक संपदा होने का गौरव प्राप्त हो चुका है। इस समय यह देश का सबसे बड़ा जीआई उत्पाद बन चुका है।
यहां भी तैयार होती है कालीन
- भदोही के अलावा बनारस के सेवापुरी, कपसेठी, लोहता और बड़ागांव सहित कई क्षेत्रों में कालीन उत्पादन का काम होता है।
यूरोप और अमेरिका में सबसे ज्यादा निर्यात
- भदोही और बनारस की कालीन सबसे ज्यादा यूरोप और अमेरिका निर्यात की जाती है। तुर्की, जर्मनी, चीन और कोरिया समेत अन्य कई देशों में भी यहां के कालीन की मांग बहुत ज्यादा है। पूरे भारत से 90 प्रतिशत कालीन का निर्यात भदोही और बनारस से ही होता है।
कालीन बुनकरों को प्रशिक्षण की दरकार
- कालीन के कारोबार से जुड़े उद्यमियों की शिकायत है कि शिल्पियों के प्रशिक्षण की समुचित व्यवस्था सरकार नहीं कर रही। भदोही निवासी रामजीत बिंद, अब्दुल करीम, प्यारे लाल, गुलब्सा बानो, संजीदा बानो, रुक्सार और बिस्मिल्लाह आदि बताते हैं कि अब नए शिल्पी नहीं मिल रहे हैं। इसलिए सरकार को इस उद्योग को बढ़ावा देने और उचित प्रशिक्षण की दिशा में सार्थक पहल करनी चाहिए।
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