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‘अम्मा’ में दिखी ममता की छांव

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वाराणसी। प्रसिद्ध रंगकर्मी डॉ. शकुंतला शुक्ला की याद में बनारस थिएटर क्लब की ओर से आयोजित तीन दिवसीय नाट्य समारोह रंग शाकुंलम् की शुरुआत रूपवाणी के स्टूडियो थिएटर में मंगलवार की शाम हुई। पहली शाम ‘अम्मा’ नाटक के मंचन से श्रीगणेश हुआ।
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नाट्य समारोह का उद्घाटन करते हुए कबीर पंथ के प्रमुख आचार्य विवेकदास ने कहा कि रंगमंच में कई स्तरों पर मनुष्यता की स्मृति सुरक्षित रही आई है । इसीलिए वह जितना पुराना है, उतना ही नया भी है । मुख्य वक्ता कवि-कथाकार अरविंद चतुर्वेद ने शकुंतला के सपनों और संघर्षों को याद किया । आशीष मिश्र के निर्गुण भजन से शुरू होने वाले इस आयोजन में पहले प्रतिमा सिन्हा की कविता ‘अम्मा’ पर यशवीर चौधरी ने एकल अभिनय प्रस्तुत किया जिसका निर्देशन सुमित श्रीवास्तव ने किया।दूसरी प्रस्तुति अमृता प्रीतम की कहानी जंगली बूटी जिसका निर्देशन ऋत्विक जोशी ने किया। इसमें संचिता गोस्वमी, यशश्विता पांडेय, सुमित केशरी, शुभम वर्मा ने अभिनय किया। स्वागत भाषण संस्था के अध्यक्ष अर्पित शिधोरे और संचालन सचिव ऋत्विक जोशी ने किया। धन्यवाद ज्ञापन संयोजक सुमित श्रीवास्तव ने किया।
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