फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

खूबसूरती में चार चांद लगा रही गुलाबी मीनाकारी

विज्ञापन
विज्ञापन
वाराणसी। सोने-चांदी से निर्मित आभूषण हों या सजावटी सामान, इन सबकी खूबसूरती में चार चांद लगा रही है गुलाबी मीनाकारी। काशी की विलुप्त होती मगर इस खास शिल्पकला की चमक दीनदयाल हस्तकला संकुल में बिखर रही है। यह कला पर्यटकों और खरीदारों को आकर्षित कर रही है। जीआई सर्टिफिकेशन के बाद इस कला और शिल्प के प्रति लोगों का रुझान बढ़ा है।
विज्ञापन

गुलाबी मीनाकारी आभूषणों, सजावटी सामान विशेषकर हाथी, घोड़े, ऊंट, चिड़िया, मोर तथा चांदी के बर्तनों आदि पर की जाती है। प्राचीन काल में राजे-रजवाड़ों के मुकुट, छत्र, वस्त्र और रत्नजड़ित आभूषण पहनने की परंपरा ने इस कला को बढ़ावा दिया। मुगलकाल में यह कला बनारस में और भी तेजी से बढ़ी। अब इस कला के कारीगर कम हो रहे हैं। काशी में लगभग 50 कारीगर ही अब इस परंपरा को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। बनारस के पक्के महाल की तंग गलियों में कुछ बुजुर्ग कारीगर यह बारीक काम करते देखे जा सकते हैं। हालांकि जीआई पंजीकरण के बाद से अब युवा शिल्पी भी इस कला को आगे बढ़ाने के लिए इसकी बारीकियां सीख रहे हैं। गुलाबी मीनाकारी का काम खास तौर पर भैरव गली, आस भैरव, गाय घाट आदि इलाकों में होता है।
यहां से गुलाबी मीनाकारी के सामान जयपुर, मुंबई और बंगलूरू तथा दिल्ली के अलावा यूरोप, अमेरिका और खाड़ी देशों तक जाते हैं। गुलाबी मीनाकारी का सालाना कारोबार करीब 10-12 करोड़ रुपये का है। राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित स्व. मोहनलाल एवं उनके पूर्वज इस काम के जाने-माने कलाकार रहे। अब युवा पीढ़ी के चुने हुए कारीगर यह काम कर रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें