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पांडुलिपि संरक्षण के लिए भेजी 42.74 करोड़ की परियोजना

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संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय ने सरस्वती भवन में संरक्षित एक लाख दुर्लभ पांडुलिपियों के संरक्षण एवं डिजिटलाइजेशन के लिए 42 करोड़ 74 लाख 98 हजार की परियोजना बनाकर केंद्र व प्रदेश सरकार को भेजी है। कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी ने बताया कि परियोजना के मूर्त रूप लेने के बाद संस्कृत के शोधार्थियों को वैश्विक स्तर पर लाभ प्राप्त होगा।
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कुलपति ने बताया कि अपर मुख्य सचिव मोनिका एस गर्ग ने परियोजना तैयार करने का निर्देश दिया था। पुस्तकालयाध्यक्ष प्रो. राजनाथ की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय कमेटी ने परियोजना तैयार की। 50 एसी, छह कंप्यूटर, सीसीटीवी, खारवा लाल कपड़ा, छत की मरम्मत आदि को शामिल किया गया है। कार्य पूर्ण होने पर सौ साल तक संग्रहित पांडुलिपियों को नष्ट होने से सुरक्षित किया जा सकता है। पांडुलिपियों के संरक्षण के लिए लाल कपड़ों को एक विशेष रसायन के लेप में लगाकर व्यवस्थित किया जाएगा।
एक हजार साल पुरानी है गीता
सरस्वती भवन पुस्तकालय में दुर्लभ पांडुलिपियों का भंडार है। इसमें हस्तलिखित एक हजार साल पुरानी श्रीमद्भागवत प्रमुख है। यह देश की प्राचीनतम पांडुलिपि है। वेद, कर्मकांड, वेदांत, सांख्य, योग, धर्मशास्त्र, ज्योतिष, मीमांसा, न्याय वैशेषिक, साहित्य, व्याकरण व आयुर्वेद की दुर्लभ पांडुलिपियां रखी हैं। इसके अलावा बौद्ध, जैन, भक्ति, कला और संगीत के विषय भी संरक्षित किए गए हैं।
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