भदोही। ध्वनि प्रदूषण पर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के अनुपालन में मंदिरों और मस्जिदों पर बिना अनुमति लाउडस्पीकर लगाने के मामले में प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है। वहीं, नगर के धर्मावलंबियों का मानना है कि सरकार पहले समारोहों में बजने वाले बैंडबाजे और पटाखों पर प्रतिबंध लगाए, जिससे आमजन को दिक्कत होती है। उसके बाद ही धर्मस्थलों के लाउडस्पीकर पर कार्रवाई करे। शनिवार को पुजारियों और मौलानाओं ने इस मसले पर खुलकर अपनी राय रखी।
छितनी तालाब स्थित प्राचीन शिव मंदिर के पुजारी विनोद झा का कहना है कि तालाबों में गंदा पानी बहाया जा रहा है। कहा कि छितनी तालाब मंदिर से सटे छितनी तालाब का अस्तित्व बचाने का प्रयास होना चाहिए। यह भी ध्वनि प्रदूषण जितना ही आवश्यक है। नईबाजार के काली माता मंदिर के पुजारी रमेश गिरी कहते हैं कि न्यायालय और सरकार का दिशा निर्देश का पालन अवश्य होगा। लेकिन, आजकल दिन-दिन भर बजने वाले लाउड स्पीकर की ओर पहले ध्यान देना होगा। कहा कि सरकार प्राचीन मंदिरों की भूमि को चिह्नित करें और उनके संरक्षण के लिए भी बिल लाए।
नूरखांपुर एक मिनारा मस्जिद के मौ. इकबाल मोहम्मदी ने कहा कि हम भारत के नागरिक हैं। यहां के कानून और संविधान का पालन करना हम अपना कर्तव्य समझते हैं। कहा कि आज यदि कहीं से ध्वनि प्रदूषण हो रहा है तो वह शादी विवाहों में बजने वाले पटाखों और बैंड बाजों से। सरकार को इस पर ध्यान देना होगा। अजिमुल्लाह चौराहे मस्जिद के पेश इमाम मौ. अनवारुल हक ने कहा कि न्यायालय का फैसला सर्वोपरि है। लेकिन, प्रशासन से गुजारिश है कि अनुमति देने में इस बात का ध्यान जरूर रखा जाए कि धर्मस्थलों पर 24 घंटे में लाउड स्पीकर का इस्तेमाल कितना होता है। इससे अनुमति देने में आसानी होगी।