Varanasi News: वाराणसी जिले में 400 किमी पाइपलाइन की उम्र चार साल होती है लेकिन यहां 200 साल से जर्जर पाइपलाइन नहीं बदली गईं। ऐसे में सवाल उठता है कि इन बूढ़ी लाइनों से कैसे अमृत बंटे?
गंगा किनारे शहर होने के बावजूद 28 वार्डों के करीब 1.50 लाख लोग दूषित जलापूर्ति की समस्या झेल रहे हैं। इन इलाकों में 200 साल पुरानी 400 किलोमीटर लंबी पानी और सीवर की लाइन एक साथ है। सवाल उठता है कि इन बूढ़ी लाइनों से कैसे अमृत बंटे? बाबा की कृपा के कारण इंदौर के भागीरथपुरा जैसा हादसा नहीं हुआ।
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जानकारों के अनुसार, दूषित जलापूर्ति में लीकेज बड़ा कारण है, जिसके चलते पेयजल और सीवर का पानी मिश्रित हो जाता है। बेनियाबाग के पास जलकल कार्यालय के पास हाल ही में खोदाई करके पाइपलाइन दुरुस्त कराई गई थी। इसी प्रकार लीकेज के कारण सिगरा चौराहा धंस गया था, जिसकी मरम्मत के लिए कैंट से लंका मार्ग के यातायात को तीन दिन के लिए डायवर्ट किया गया था।
200 साल पुरानी पानी की पाइपलाइनें जर्जर हो चुकी हैं। इससे पानी लीकेज के जरिये बहकर बर्बाद हो रहा है। इन पाइपलाइनों की कभी-कभार मरम्मत हो जाती है। पूर्व में काशी हिंदू विश्वविद्यालय के भू-भौतिकी विभाग की जांच रिपोर्ट में कहा गया था कि शहर में क्षतिग्रस्त लाइनें पीने के पानी को प्रदूषित कर रही हैं।
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372 किमी जर्जर लाइन बदलने के लिए 823 करोड़ रुपये की योजना
18 वार्डों में 372 किमी जर्जर लाइन बदलने के लिए 823 करोड़ रुपये की योजना बनाई गई है। इन वार्डों में सबसे अधिक शिकायतें आती हैं। वार्डवार काम के लिए पहली बार एक साथ धनराशि जारी की गई। विस्तारित क्षेत्रों के लिए अमृत-2.0 योजना के तहत 259 करोड़ रुपये की सीवर और पेयजल की तीन बड़ी परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई। यह कार्य ‘ट्रेंचलेस तकनीक’ से होगा, जिससे कम खोदाई की आवश्यकता होगी।
पक्के महाल से हर महीने आती हैं 250 शिकायतें
जलकल में हर महीने औसतन 250 शिकायतें आ रही हैं। इनमें ज्यादातर शिकायतें पक्के महाल क्षेत्र से जुड़ी हैं। यहां दूषित जलापूर्ति का संकट सबसे अधिक है, जबकि लगातार मरम्मत का कार्य होता रहता है।
इन इलाकों में होती है दूषित जलापूर्ति
इन इलाकों में दूषित जलापूर्ति की शिकायतें सबसे अधिक हैं। प्रभावित इलाके हैं: ईश्वरगंगी, दारानगर, औसानगंज, नाटीइमली, चौकाघाट, गायघाट, रामघाट, दशाश्वमेध, शिवाला, भदैनी, मदनपुरा, भेलूपुर आदि।
एक किमी पाइप में 450 ज्वाइंट
एक किलोमीटर पाइपलाइन में 450 ज्वाइंट हैं। यदि किसी भी ज्वाइंट में लीकेज होता है, तो सक्शन के कारण सीवर का पानी पेयजल पाइपलाइन में मिल जाता है। इसके बाद दूषित जलापूर्ति होती है।
275.42 करोड़ रुपये बजट
जलकल हर साल पानी की आपूर्ति के लिए 275.42 करोड़ रुपये खर्च करता है। इसका 10 प्रतिशत लाइनों की मरम्मत और बदलने पर खर्च होता है। बावजूद इसके लीकेज की समस्या का समाधान नहीं हो पाया है।
अधिकारी बोले
18 वार्ड की जर्जर पाइपलाइन बदलने का काम होने वाला है। इससे दूषित जलापूर्ति और लीकेज की समस्या पूरी तरह से दूर हो जाएगी। -विश्वनाथ, सचिव जलकल