वाराणसी। अक्षय तृतीया से पहले फ र्जी हॉलमार्क की काली छाया ने आभूषणों की शुद्धता पर बट्टा लगा दिया है। भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) की पूर्वांचल की सबसे बड़ी सराफा मंडी में की गई कार्रवाई में यह बात सामने आई कि हॉलमार्क लगा जो सोना आप खरीद रहे हैं, वह भी शुद्धता की कसौटी पर खरा नहीं है। हॉलमार्क की भी डुप्लीकेसी हो सकती है। मिलावटी सोने के गहनों पर फ र्जी हॉलमार्क लगाकर 22 कैरेट वाले सोने की दर पर बेचा जा रहा है।
नियमानुसार, जेवर पर जितनी शुद्धता की मुहर लगी होती है उससे कम सोना नहीं होना चाहिए। लेकिन अधिक मुनाफे के चक्कर में कई सराफ ग्राहकों के विश्वास के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। ग्राहकों सोना खरा नहीं होने की जानकारी तब मिलती है, जब वह गहने बेचने जाते हैं और मूल्य कम मिलता है। ऐसी ही शिकायत पर बीआईएस ने चार सेंटरों पर छापेमारी कर हॉलमार्क का खेल पकड़ा था और लेजर हालमार्क मशीन, हालमार्क वाले आभूषण, लैपटॉप आदि जब्त किया था। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसा काम सिर्फ छोटे ही नहीं, बड़े शोरूम वाले भी करते है। एक हॉलमार्क केंद्र संचालक के मुताबिक, कई बार मार्किंग के लिए भेजे गए जेवर मानक से नीचे होने की वजह से रिजेक्ट भी हो जाते हैं।
सराफ ा मंडी के जानकारों का कहना है कि छोटे दुकानदार मोहल्ले की दुकानदारी की बात कहकर हॉलमार्क नहीं कराते हैं। कहते हैं कि अगर सही हॉलमार्क कराएंगे तो ग्राहक इतने महंगे जेवर नहीं खरीदेंगे। एक तोला सोने पर बनवाई ही पांच से छह हजार हो जाती है। इससे जेवर की कीमत 35 से 36 हजार हो जाती है। वहीं, बिना हॉलमार्क वाले जेवर में 50 से 60 फ ीसद ही सोना होता है और कीमत पूरे सोने की वसूल ली जाती है। सस्ते के चक्कर में ग्राहक भी ऐसे आभूषण खरीद लेते हैं।