वाराणसी। बनारस शहर के हालात यह हैं कि अब भी कूड़े के कलेक्शन में मानकों का पालन नहीं होता। अस्पताल के कचरा निस्तारण का अब भी कोई प्रावधान नहीं है। सभी नर्सिंग होम, अस्पताल और क्लीनिक मनमानी पर उतारू हैं। उन पर कार्रवाई में ढिलाई का ही नतीजा है कि जैविक कूड़े में ही अस्पताल से निकलने वाले गाज, पट्टी, सुई आदि को डाल दिया जाता है। वहीं शहर की स्वच्छता के लिहाज से सीवर व ड्रेनेज व्यवस्था ध्वस्त है। प्लास्टिक कचरे का निस्तारण और उन पर प्रभावी रोक के लिए कोई ठोस कदम नगर निगम नहीं उठा रहा है।
स्वच्छता सर्वेक्षण 2019 में बीते साल की तुलना में तीन पायदान नीचे खिसके नगर निगम प्रशासन ने मंथन शुरू कर दिया है। उन सभी बिंदुओं पर पड़ताल हो रही है जहां चूक हुई है। इसके साथ ही सर्वे एजेंसी की रिपोर्ट पर भी आपत्ति दर्ज कराने की तैयारी की जा रही है। हालांकि सबसे ज्यादा मंथन कैटेगरी सर्टिफिकेशन को लेकर है। नए कॉलम से नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारी अनभिज्ञ थे। इसी कारण से 1250 नम्बर में से मात्र 450 नम्बर मिले।