वाराणसी। गोविंदाचार्य ने कहा कि वर्तमान विश्व में मानवता और प्रकृ ति बाजारीकरण के संकटों से घिर गई है। जिससे उबरने के उपायों पर विचार करना वक्त का तकाजा है। देशभक्ति, ईमानदारी, कर्मशीलता और साहस किसी एक विचारधारा की बपौती नहीं है। गोंविंदाचार्य ने 55 साल के जीवन के अपने अनुभव और चिंतन को साझा किया। वह रविवार को सिकरौल स्थित वाराणसी गर्ल्स डिग्री कॉलेज में आयोजित संवाद व अभिनंदन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
वर्तमान राजनैतिक हालात पर गोविंदाचार्य ने कहा कि देशभक्ति, ईमानदारी, कर्मशीलता और साहस जैसे मूल्य किसी एक विचारधारा की बपौती नहीं है। मैंने जेपी आंदोलन के समय से अनुभव किया है कि देश के प्रति सभी विचारधारा के लोगों में सहज भक्ति भाव है। किसी एक या खास विचारधारा के लोगों में ही ईमानदारी और कर्मशीलता होने का दावा नहीं किया जा सकता। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के वेद विभाग के प्रो. पतंजलि मिश्र के नेतृत्व में वैदिक विद्वानों ने मंत्रोच्चार के साथ उनका अभिनंदन किया।
संवाद में प्रो. शंकर शरण, डा. रवि सिंह यादव, सेंट्रल एवं बनारस बार काउंसिल के पूर्व अध्यक्ष अमरनाथ शर्मा, विवेक शंकर तिवारी, वरिष्ठ पत्रकार एके लारी, व्यापार मंडल के अनिल केशरी, विनयशंकर राय मुन्ना, चंद्रकांत सिंह, कॉमरेड सिद्धार्थ, सुधांशु सिंह, अजयेंद्र दुबे, प्रदीप राय, बीरेंद्र यादव, डॉ. संजय सिंह गौतम, इंद्रेश सिंह, संजय शुक्ल आदि रहे।