भदोही। हर समय प्रफुल्लित रहना, दूसरों से मेल मिलाप और सद्भावपूर्वक रहना, मन में द्वेष ईर्ष्या को स्थान नहीं देना और सकारात्मक सोचना, तनाव से मुक्ति पाने का सरल तरीका है। हमसे कोई द्वेष और ईर्ष्या रखता है तो वह अपना तनाव बढ़ाता है। यदि हम उसके बारे में सोचते हैं तो हम भी तनावग्रस्त हो जाते हैं। यदि हम सकारात्मक सोच रखते हैं तो परमात्मा हमें निराश नहीं करता। ये बातें पूनम बहन ने सनबीम स्कूल में शनिवार को शुरू हुए 12 दिवसीय अलविदा तनाव शिविर में कही।
कहा कि हमारी समस्या का मूल कारण है कि हम बहुत कुछ, बहुत जल्दी प्राप्त करना चाहते हैं। हमारे पास नौकरी होती है, अपना घर होता है, अपनी गाड़ी होती है फिर भी हम और पाने की जुगत में दौड़-भाग करते रहते हैं। तनावग्रस्त जीवन का यही प्रमुख कारण है। अध्यात्मिकता से ही तनाव को खत्म किया जा सकता है। कहा हमेशा प्रसन्न रहना सफल और तनावमुक्त जीवन की प्रथम जरूरत है। हमें यह जानना है कि प्रसन्नता कहां से आती है? दूसरों के प्रति शुभेच्छा रखने, नि:स्वार्थ प्रेम बांटने से आप हमेशा प्रसन्न रहेंगे। उन्होंने कहा कि मन उदासी की ओर जाए तो प्रसन्न रहने के कारण ढूंढो ताकि मन दु:खी न हो। बताया कि अनुसंधान से यह बात साबित हुई है कि हम जैसा सोचेंगे, वैसा ही बन जाएंगे।
यदि बुरा वक्त आता है, संबंध बिगड़ते हैं, व्यवसाय खराब होता है, स्वास्थ्य खराब होता है तो यह सोचना चाहिए कि यह बुरा वक्त गुजर जाएगा। आप रात को अलार्म लगाकर सोते हैं कि सुबह चार बजे उठना है। आप देखेंगे कि अलार्म बजने से पहले ही आपकी नींद खुल जाती है। इससे पूर्व जिलाधिकारी विशाख जी ने शिविर का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा यह सत्य है कि मन में सकारात्मक सोच रखेंगे तो जीवन उसका अनुसरण करेगा। सांसद वीरेंद्र सिंह और विधायक रवींद्रनाथ त्रिपाठी ने भी लोगों को संबोधित करते हुए स्वस्थ और तनावमुक्त समाज के निर्माण के लिए शुभकामनाएं दीं। केंद्र प्रभारी विजयलक्ष्मी, सुरेंद्र ने सहभागियों को धन्यवाद ज्ञापित किया।