अजमेर वाले ख्वाजा का 806वां उर्स रविवार को पूरे अकीदत और एहतेराम के साथ मनाया गया। इस दौरान बनारस में भी जगह-जगह ख्वाजा के नाम पर फातेहा पढ़ा गया और लोगों में लंगर बांटा गया। इस दौरान मदरसों, मस्जिदों में ख्वाजा का ही नाम गूंजता रहा और लोगों ने देश और दुनिया में अमन-चैन, शांति की दुआएं मांगी।
ख्वाजा के उर्स पर लाट सरैया, पठानी टोला, बड़ी बाजार, लल्लापुरा, कचहरी बजरडीहा, औरंगाबाद, शिवाला आदि इलाकों में मदरसों, मस्जिदों में खानकाहों में लोगों ने फातेहा पढ़ा। इस दौरान काली महल शिया मस्जिद के मदरसा बाबुल हवायज में मौलाना अली इमाम जाफरी के संयोजन में बच्चों ने कुरानख्वानी की। हजरत अली कमेटी के सचिव सैयद फरमान हैदर ने झुकता है जमाना अजमेर की गली में के माध्यम से लोगों को अजमेर वाले ख्वाजा के जीवन से जुड़ी जानकारियां दी। कहा कि 806 साल पहले ख्वाजा ने अजमेर में अपनी आखिरी सांसें ली और ऐसी जिंदगी गुजारी कि आज सारी दुनिया उनके दर पर अपनी मन्नतें मांगने पहुंच रही हैं। इस अवसर पर बड़ी संख्या में सभी धर्मों के लोग शामिल हुए। बताया कि 902 साल पहले ख्वाजा का जन्म इरान के खुरातान नगर में संजर नामी स्थान पर हुआ था।