वाराणसी। प्रख्यात संत डा. सुमन भाई ‘मानस भूषण‘ ने कहा कि राष्ट्र में सबके लिए अलग-अलग कानून की आवश्यकता नहीं है, सभी नागरिकों के लिए एक कानून, एक संविधान होना चाहिए, इसके विरोध का कोई औचित्य नही। समाज में कभी आवश्यकता पड़ी थी तो बाल विवाह, सती प्रथा जैसी रीतियां शुरू हुई थी, परंतु धीरे-धीरे समाज जागृत हुआ, शिक्षित हुआ तो ये सब प्रथाएं बंद हुई। ठीक उसी प्रकार कभी तीन तलाक की परंपरा भी रही होगी लेकिन अब समाज शिक्षित हो चुका है, ऐसे में इन परंपराओं की समाज में कोई आवश्यकता नही। दु:खद यह है कि यह फैसला सुप्रीम कोर्ट को करना पड़ता है जबकि यह तो समाज को ही तय करना चाहिए था।
टाउनहाल के मैदान में अखिल भारतीय मानस परिवार के तत्वावधान में चल रही नौ दिवसीय श्रीरामकथा के दूसरे दिन गुरूवार को श्रद्धालुओं को प्रवचन में सुमन भाई ने कहा कि समाज में फैली जड़ता पर प्रहार करते हुए कहा कि प्रत्येक नवरात्रि में हम कन्या पूजन करते है लेकिन वही कन्या जब गर्भ में रहती है तो उसकी भ्रूण हत्या कर दी जाती है, यदि वहां बच जाती है तो उसके साथ कोई निर्भया जैसा कांड हो जाता है। यहीं वहां बच जाती है तो दहेज दानवों की भेंट चढ़ जाती है। अंत में उन्हें वृद्धाश्रम भेज दिया जाता है। इसके पूर्व कथा की शुरुआत पातालपुरी मठ के पीठाधीश्वर महंत बालकदास ने किया। उनका स्वागत अरविंद अग्रवाल ने किया। व्यासपीठ का पूजन विश्वंभर प्रसाद अग्रवाल ने सपत्नी किया। स्वागत यूएस अग्रवाल, मंच संचालन अजय गुप्ता एवं धन्यवाद ज्ञापन रविशंकर सिंह ने दिया। कथा के दौरान मुख्य रूप से यशभारती पुरस्कृत विष्णु यादव, गिरीश चन्द्र, मनोज मिश्र, राजेश डाेंगरा, भईया लाल, श्याम सुन्दर सिंह आदि मौजूद रहे।