वाराणसी से चलने वाली या होकर गुजरने वाली ट्रेनें प्रभु भरोसे ही ट्रैक पर दौड़ रही हैं। जहां जगह-जगह ट्रैक की हालत बेहद खस्ता है तो वहीं उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल और पूर्वोत्तर रेलवे वाराणसी मंडल में कर्मचारियों का जबरदस्त अभाव है।
कैंट रेलवे स्टेशन-मंडुवाडीह के बीच ट्रैक की हालत बेहद खस्ता है। कहीं पटरियों के स्लीपर जर्जर यहां तक की नजर ही नही आते तो कहीं पटरियों के नट बोल्ट ही गायब है। कुछ यही हाल मुगलसराय एंड की तरफ की पटरी का भी है। यही नही कई स्थानों पर तो पटरियां मिट्टी में धंस सरीखी गई हैं। यही कारण है कि गूलर यार्ड में अक्सर इंजन डिरेल हो जाता है। प्लेटफार्म नंबर चार का हाल तो बेहद खस्ता है। चूहों की बनाई गई बिल ने इस ट्रैक को दुर्घटना संभावित क्षेत्र बना दिया है। ट्रैक के नीचे की जमीन में चूहों की बिल कई स्थानों पर देखे जा सकते हैं पर इसके लिए कोई भी प्रभावी कार्रवाई नही हो रही है। मंडुवाडीह रेलवे स्टेशन के इर्द-गिर्द भी यही हाल है। वाराणसी के सभी स्टेशनों और आस-पास के क्षेत्र में मेंटनेंस का अभाव साफ देखा जा सकता है। वहीं दूसरी ओर कर्मचारियों की कमी भी खस्ताहाल सिस्टम के लिए जिम्मेदार है। रोलर कोस्टिंग(रात में ट्रेनों के नीचे बैठकर पहियों की मूवमेंट परखने वाले) से जुड़े कर्मचारियों का बेहद अभाव है। इसके चलते रात में ट्रेनों के परिचालन में शुरुआती गड़बड़ियां छूट जा रही है और बाद में समस्या का कारण बन जा रही हैं। इसी प्रकार ट्रैक मेंटनेंस और बोगी मेंटनेंस से जुड़े स्टॉफ का भी जबरदस्त अभाव है।
वॉकी-टॉकी का जबरदस्त अभाव
- उत्तर और पूर्वोत्तर रेलवे में वॉकी टॉकी का जबरदस्त अभाव है। अकेले कैंट रेलेव स्टेशन पर 70 प्रतिशत वॉकी टॉकी या तो खराब हो गई है या प्रयोग योग्य नही है। ऐसे में पायलट और गार्ड के पास सिगनल या फिर खुद के फोन के इस्तेमाल के सिवा और कोई चारा नही है। जबकि ट्रेन में ड्यूटी शुरू होने के साथ ही फोन स्विच ऑफ के निर्देश हैं। यही ट्रेन शंटिंग के दौरान भी वॉकी टॉकी का अभाव एक बड़ी समस्या है। लगभग 500 कर्मचारियों के लिए वॉकी टॉकी जरूरत स्थानीय उत्तर रेलवे कर्मचारियों के लिए है। पूर्वोत्तर रेलवे वाराणसी मंडल में भी यह एक बड़ी समस्या है।
अभी भी 335 क्रासिंग को किया जाना है मेंड
पूर्वोत्तर रेलवे वाराणसी मंडल में अभी 335 रेलवे क्रासिंग को मेंड(मानव सहित) किया जाना है। कई बार मानव रहित क्रासिंग दुर्घटना का कारण बन जा रही हैं। हालांकि रेल प्रशासन द्वारा क्रांसिंग को मेंड किया जा रहा है या सबवे बनाया जा रहा है। यही नही कम दबाव वाले क्रासिंग को बंद भी किया जा रहा है। मंडल में कुल 818 रेलवे क्रासिंग हैं। इस वित्तीय वर्ष में 133मानव रहित क्रासिंग को मेंड किया जाना है। जनसंपर्क अधिकार पूर्वोत्तर रेलवे अशोक कुमार ने बताया कि मानव रहित क्रासिंग पर गेट मित्र तैनात किए गए हैं जो ट्रेन आने के दौरान यातायात को नियंत्रित करते हैं।