वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय संगीत एवं मंच कला संकाय में आयोजित पूर्वाचार्य स्मृति संगीत समारोह का दूसरा दिन गायन और वादन से सजा। गुरुवार को डॉ. अजीत भट्टाचार्य को समर्पित समारोह का शुभारंभ आशीष मिश्रा के स्वतंत्र तबला वादन से हुआ। तीन ताल की प्रस्तुति से उन्होंने श्रोताओं को आनंदित किया। हारमोनियम पर पंकज शर्मा ने संगत की। दूसरी प्रस्तुति में डॉ. विजय कपूर का गायन हुआ। उन्होंने राग जोगकोंस विलंबित एक ताल में सुघर बर पायो... की तान छेड़कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
गायन को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने झपताल में जय राम जय राम.. और द्रुत एक ताल में निबद्ध बंदिश प्रथम सुमिर श्री गणेश सुनाया। तबले पर डॉ. रजनीश तिवारी और सारंगी पर अनीश मिश्रा ने संगत की। सितारवादक डॉ. प्रेम किशोर मिश्रा ने राग वाचस्पति की प्रस्तुति की। समापन उन्होंने पूर्वी धुन से किया। तबले पर पं. कुबेर नाथ मिश्र ने संगत की।
संगीत की शृंखला को आगे बढ़ाते हुए पं. पुंडलिक कृष्ण भागवत ने राग मुल्तानी में गोकुल गांव का छोर... सुनाया। तीन ताल में तुम बिन तरसे जियरा मोरा... तू दाता मैं भिखारी की मनोहारी प्रस्तुति की। तबले पर पुष्कर भावगत और सारंगी पर अनीश मिश्रा ने संगत की। प्रियती शर्मा राग भूपाली में सखी री सुन बाजत बांसुरिया... सुनाया।
छठवीं प्रस्तुति में विजयश्री शर्मा ने राग भीमपलासी में विलंबित एक ताल में सांझ भी मनवा..., द्रुत एक ताल में अंशुमान उदित भयो, रघुवर तुमको मेरी लाज... सुनाया। तबले पर पंकज राय और हारमोनियम पर पंकज शर्मा ने संगत की। संकाय प्रमुख प्रो. राजेश शाह, प्रो. शारदा वेलंकर, प्रो. प्रवीण उद्धव, डॉ. सुप्रिया शाह ने माल्यार्पण कर कार्यक्रम की शुरुआत की। प्रार्थना प्रो. के शशिकुमार ने किया। डॉ. भट्टाचार्य के व्यक्तित्व पर डॉ. ज्ञानेश चंद्र पांडेय ने प्रकाश डाला।