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अस् थायी गोशालाओं में चारा-पानी की समस्या

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ज्ञानपुर। अस्थायी गोशालाओं में सुविधाएं नहीं पहुंचने से निगरानी कर रहे प्रधानों की मुश्किलें बढ़ गईं हैं। चारा और पानी जैसी सुविधाएं मुहैया कराने के लिए प्रस्तावित बजट की फाइलें ब्लॉकों में लटकी हैं। शासन से जारी धनराशि अब तक नहीं मिलने से मवेशियों की देखरेख को लेकर प्रधानों के सामने आर्थिक समस्या हो गई है। कई प्रधानों ने जिलाधिकारी का ध्यान आकृष्ट कराते हुए सरकारी मदद भेजने की गुहार लगाई है।
जिले के नगरीय एवं ग्रामीण इलाकों में छुट्टा पशुओं की समस्या को देखते हुए जिला प्रशासन की ओर से कई गांवों में अस्थायी गोशालाएं खोली गईं हैं। मवेशियों के देखरेख के लिए ब्लॉकवार पांच-पांच लाख रूपये आवंटित भी किया गया है, लेकिन महीने भर से अधिक समय गुजरने के बाद भी अस्थायी गोशाला देखरेख कर रहे प्रधानों के पास पैसा नहीं पहुंचा। ऐेसे में उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जिन स्थानों पर तालाब हैं, वहां तो पानी का संकट नहीं है, लेकिन जहां पेयजल की व्यवस्था नहीं है वहां टैंकर से पानी मंगाकर मवेशियों को पिलाया जा रहा है।
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औराई के समधा, ज्ञानपुर के पूरे रजा समेत कई अस्थायी गोशाला में कमोबेश यही समस्या हो रही है। सूत्रों की मानें तो प्रस्तावित फाइलें करीब एक पखवाड़े से ब्लॉकों में अटकी पड़ी हैं, जिससे काफी दिक्कत हो रही है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी आईजे खान ने कहा कि एक-दो ब्लॉक में बीडीओ का खाता नहीं खुला है, उसे खोला जा रहा है। सोमवार तक सभी के पास पैसा पहुंच जाएगा।
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