सारनाथ। क्षेत्र के पहड़िया से नारायण फाउंडेशन ट्रस्ट बनाया और फिर फर्जी दस्तावेजों को लगाकर जयप्रकाश महाविद्यालय उमरहां वाराणसी में बीटीसी (डीएलएड) की मान्यता ले लिया। इस मामले में ट्रस्ट के प्रबंधक ओमप्रकाश सिंह सहित पांच अन्य पर धोखाधड़ी सहित कई अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज करने का आदेश न्यायालय ने सारनाथ थानाध्यक्ष को दिया। इसके आधार पर थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया गया।
जयप्रकाश महाविद्यालय उमरहां वाराणसी में सन 2004 से ही विभिन्न पाठ्यक्रमों में अध्ययन व अध्यापन का कार्य चल रहा था। उसी दौरान सन 2012 में प्रबंधक रहे ओमप्रकाश सिंह ने एक ट्रस्ट नारायण फाउंडेशन पहड़िया वाराणसी बना लिया और अधिकारियों को धोखे में रखकर सोसायटी से चल रहे महाविद्यालय को ट्रस्ट से संचालित करा दिया। इतना ही नहीं उन्होंने सन 2016 में महाविद्यालय की ही सारी व्यवस्थाओं को दिखाते हुए बीटीसी (डीएलएड) की मान्यता भी प्राप्त कर ली, जबकि मान्यता प्रदान करने वाली संस्था राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद् जयपुर (राजस्थान) जो अब नई दिल्ली में स्थित है, की नियमावली में स्पष्ट निर्देश है कि मान्यता लेने वाली संस्था के पास स्वयं की जमीन हो या 30 वर्ष की लीज पर ली गई हो। इसमें निर्मित कमरे हों और सभी आधुनिक सुविधाएं हों तथा उसमें पहले से कोई अन्य पाठ्यक्रम न संचालित हो रहा हो, न ही उसमें कोई अन्य कार्य हो रहा हो।
जब इसकी जानकारी महाविद्यालय के अध्यक्ष सत्यनारायण प्रसाद को हुई तब उन्होंने इसकी शिकायत राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद् नई दिल्ली व सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी इलाहाबाद सहित शासन-प्रशासन से भी किया परंतु कोई भी कार्रवाई नहीं हुई। मजबूर होकर महाविद्यालय के अध्यक्ष सत्यनारायण प्रसाद ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट वाराणसी के यहां प्रार्थना पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई, जिसपर सुनवाई करते हुए उन्होंने नारायण फाउंडेशन पहड़िया वाराणसी के प्रबंधक ओमप्रकाश सिंह, विद्याप्रकाश सिंह, पलकधारी यादव, आनंद विश्वकर्मा, दिनेश सिंह यादव पर धोखाधड़ी सहित कई अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विवेचना करने का आदेश पारित किया गया था। आदेश के बाद सारनाथ पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया।