संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के मुख्य भवन के जीर्णोद्धार के लिए मिले साढ़े चार करोड़ में से सवा दो करोड़ रुपये लैप्स हो गए। समय से कोषागार से रुपये न निकल पाना इसकी मुख्य वजह है। पिछले साल जुलाई में शासन ने यह धनराशि स्वीकृत की थी।
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अब विश्वविद्यालय की मांग पर शासन ने दुबारा पांच करोड़ रुपये दिया है, जिससे काम चल रहा है। परिसर में बने इस ऐतिहासिक भवन की दशा खराब हो गई थी। आए दिन प्लास्टर गिरता रहता था, जिससे कक्षाएं चला पाना तक मुश्किल हो गया था।
विश्वविद्यालय प्रशासन के कई बार प्रयास के बाद 06 जुलाई, 2015 को शासन ने 4.55 करोड़ रुपये जीर्णोद्धार मद में स्वीकृत किया। इसमें से दो करोड़ सत्ताईस लाख पचास हजार रुपये कोषागार से निकल न पाने से लैप्स हो गया।
शासन ने वित्तीय वर्ष 2016-17 के लिए पांच करोड़ रुपये फिर स्वीकृत किए। विशेष सचिव प्रमोद चंद गुप्ता ने कुलसचिव को भेजे पत्र में इसकी जानकारी दी है।