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हिंदी के विकास में मराठी भाषाकारों का अहम योगदान

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वाराणसी। संपादकाचार्य बाबूराव विष्णु पराड़कर की पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में रविवार को आयोजित स्मृति समारोह में हिंदी पत्रकारिता और हिंदी के विकास में उनके योगदान को याद किया गया। मराठी पत्रकारों की हिंदी सेवा तथा साहित्यिक-सांस्कृतिक पत्रकारिता विषय पर मंथन के साथ ही इसके बदलते परिवेश पर चर्चा हुई।
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पराड़कर स्मृति भवन में आयोजित समारोह में वरिष्ठ पत्रकार नवीन जोशी ने कहा कि मराठी मूल के हिंदी पत्रकारों ने हिंदी के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। विशेष रूप से बाबूराव विष्णु पराड़कर, लक्ष्मण गर्दे, माधवराव सप्रे ने हिंदी को मजबूत किया। आज हिंदी पत्रकारिता की भाषा को और मजबूत करने की जरूरत है।
पुणे विश्वविद्यालय पत्रकारिता विभाग के पूर्व अध्यक्ष एसके कुलकर्णी ने कहा कि पराड़कर जी ने हिंदी भाषा के विकास में महत्वपूर्ण योगदान किया। हमेशा उसे आगे बढ़ाने में जुटे रहे। कुलकर्णी इन दिनों महाराष्ट्र में पराड़कर के गांव पराड़ में स्मारक का निर्माण भी करा रहे हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय के राजनीति शास्त्र के शिक्षक रहे प्रो. रमेश दीक्षित ने कहा कि संकुचित और संकीर्ण मनोवृत्ति को तिलांजलि देकर सार्वदेशिक सरोकारों से जुड़ने की कोशिश करनी चाहिए। ख्यात नाटककार राजेश कुमार ने कहा कि वर्तमान में बाजारवाद का मीडिया पर काफी दबाव है। दिनोंदिन साहित्य और संस्कृति के लिए जगह कम होती जा रही है। वर्तमान में साहित्य और संस्कृति पत्रकारिता को समृद्ध करने की जरूरत है। बाबूराव विष्णु पराड़कर स्मृति न्यास के तत्वावधान में उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान, काशी पत्रकार संघ और नादरंग के सहयोग से आयोजित समारोह में काशी पत्रकार संघ के अध्यक्ष सुभाष चंद्र सिंह, मंत्री अत्रि भारद्वाज, राजनारायण शुक्ल मौजूद रहे। संचालन आलोक पराड़कर ने किया।
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धर्म और अध्यात्म में वास्तविकता का बोध जरूरी: प्रो. राजाराम
वाराणसी। हमारी संस्कृति वसुधैव कुटंबकम की अवधारणा पर चलती है। यह हम सभी का दायित्व है कि धर्म और अध्यात्म के मामले में सभी को वास्तविकता का बोध कराएं। ये बातें पूर्वांचल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजाराम यादव ने कहीं। वह रविवार को महाबोधि इंटर कॉलेज में अध्यात्म का विस्तार और सोशल मीडिया विषयक संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। माखन लाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला ने कहा कि आज का युवा सोशल मीडिया का सबसे बड़ा उपयोगकर्ता है। आज का युवा सोशल मीडिया का सबसे बड़ा उपयोगकर्ता है। जरूरी है कि हम अपनी प्राचीन ज्ञान परंपरा को आधुनिक नजरिए से प्रस्तुत करने की। प्रो. चारु दत्त पिंगले, प्रो. संजय द्विवेदी, चंद्रभूषण, प्रो. रमेश प्रसाद, प्रो. हरिप्रसाद अधिकारी ने भी विचार व्यक्त किए। संचालन प्रो. संजय द्विवेदी और धन्यवाद ज्ञापन संदीप सिंह ने किया। तकनीकी सत्रों में प्रो. राममोहन पाठक, डॉ. एसके कुलकर्णी, डॉ. सौरभ मालवीय, डॉ. अवनीश वाजपेयी, डॉ. रजनीश कुमार चतुर्वेदी, डॉ. केदारनाथ, डॉ. परमात्मा मिश्र, डॉ. राजेश श्रीवास्तव, डॉ. बाला लखेंद्र, डॉ. किंशुक पाठक ने विचार व्यक्त किए।
सकारात्मक चिंतन और संवाद से ही समाधान : प्रो. कुठियाला
वाराणसी। अभिव्यक्ति की आजादी और सूचना का अधिकार निश्चय ही पत्रकारिता के महत्वपूर्ण आधार हैं। पत्रकारिता अपने राष्ट्रीय और सामाजिक दायित्वों से विमुख नही हो सकती। यह मानने में कोई संकोच नहीं है कि अपनी विरासत से हम विचलित हुए हैं लेकिन सकारात्मक चिंतन और संवाद से समाधान का रास्ता ढूंढा जा सकता है। ये बातें माखन लाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बृजकिशोर कुठियाला ने कहीं। वह काशी पत्रकार संघ की ओर से पराड़कर स्मृति भवन में आयोजित संवाद कार्यक्रम में विचार व्यक्त कर रहे थे। प्रो. कुठियाला ने कहा कि मौजूदा परिवेश में मिशनरी पत्रकारिता के लिए भले ही अवसर कम हों पर समाज और मानवता के प्रति चेतना तथा अपने उत्तरदायित्व का विचार सही रास्ते की ओर अग्रसर कर सकता है। समाज में संवाद के स्वराज पर जोर दिया। चिंता जताई कि आज की पत्रकारिता से समाज में विघटन पैदा हो रही है। पत्रकारिता पहले मिशन से लाभ और अब लोभ की ओर अग्रसर है। स्वागत संघ के अध्यक्ष सुभाष चंद सिंह और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अत्रि भारद्वाज ने किया। कार्यक्रम प्रो. राममोहन पाठक, एसके कुलकर्णी, डॉ. जितेंद्र नाथ मिश्र, आलोक पराड़कर, संजय अस्थाना, एके लॉरी आदि प्रमुख रूप से मौजूद थे।
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