वाराणसी। लखनऊ में विधानसभा के सामने आलू फेंकने वालों का वाराणसी कनेक्शन भी सामने आया है। पुलिस ने पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पत्नी और सांसद डिंपल यादव के संसदीय क्षेत्र कन्नौज में तीन लोग इस मामले में गिरफ्तार किए गए हैं, वे वाराणसी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय जनसंपर्क कार्यालय के सामने भी आलू फेंकना चाहते थे। सुर्खियों में आने के लिए एक स्थानीय पूर्व मंत्री की अगुआई में ये तीनों लोग इसे यहां आकर अंजाम देना चाहते थे। तीनों की गिरफ्तारी के बाद पूर्व मंत्री अपने साथी समेत दो दिन पहले मुंबई जा चुकेे हैं। उनके अन्य समर्थक जांच की आंच से बचने के लिए लखनऊ में अपने आकाओं के यहां शरण लिए हुए हैं।
लखनऊ पुलिस ने आलू फेंकने के मामले का खुलासा करते हुए जिन शिवेंद्र चौहान कुक्कू, जय कुमार तिवारी और कन्नौज जिला पंचायत अध्यक्ष के पति संजू कटियार को आरोपी बनाया है, सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उन्हें विधानसभा चुनाव के दौरान बनारस की जिम्मेदारी सौंपी थी। अखिलेश ने पत्र जारी कर उन्हें सपा-कांग्रेस गठबंधन के प्रत्याशियों का प्रचार करने को कहा था। अखिलेश के निजी सचिव गजेंद्र यादव के साथ ये लोग सारनाथ स्थित राही पर्यटन गृह में रुके थे। यहां रुककर इन्होंने प्रचार भी किया था। बाद में ये तीनों लोग पिछले महीने भी यहां आए थे।
अब तक की जांच में ही पता चला है कि सपा सरकार में अखिलेश परिवार से नजदीकी के कारण इन नेताओं की कंपनी को वाराणसी-बाबतपुर मार्ग पर सड़क निर्माण के लिए 40 करोड़ रुपये का काम मिला था। इन तीनों में से एक का भाई अभी भी बनारस में है। वहीं, इस बारे में सपा जिलाध्यक्ष डॉ. पीयूष यादव का दावा है कि इन तीनों को विधानसभा चुनाव के दौरान वाराणसी में प्रचार की जिम्मेदारी नहीं दी गई थी।