वाराणसी। ज्ञानवापी परिसर में व्यास भवन और मिर्जापुर कोठी के बीच लगने वाली दुकानों को विश्वनाथ मंदिर ने अवैध बताया है। उनका कहना है कि मंदिर क्षेत्र में बिना किसी अनुमति के दुकानदारों ने दुकानें लगाई हैं। वहीं व्यापारियों ने इसे मानवाधिकार का हनन बताते हुए इसकी शिकायत पीएमओ से करने की बात कही है।
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी श्याम नारायण त्रिपाठी का कहना है कि मंदिर क्षेत्र में दुकानदारों ने अतिक्रमण कर रखा है। मंदिर को जगह की आवश्यकता था इसलिए ज्ञानवापी परिसर से दुकानों को हटवाया गया है। व्यापारी बेवजह प्रशासनिक कार्यवाही का विरोध कर रहे हैं। व्यापारी मंदिर को स्थान का किराया तक नहीं दे रहे थे। किसी भी व्यापारी को अगर स्थान की जरूरत है तो वह मंदिर में अपना पंजीकरण कराए और दुकान लगवा सकता है। रविवार को विश्वनाथ गली परिसर में मलबा पड़ा रहा। व्यापारियों का कहना था कि दुकानें टूट चुकी हैं और उनके पास आजीविका चलाने का जरिया नहीं रह गया है। विरोध स्वरूप वह विश्वनाथ गली में अब भिक्षाटन के लिए निकलेंगे। विश्वनाथ गली व्यवसायी समिति ने दुकानें तोड़े जाने के विरोध आंदोलन की रणनीति बनानी शुरू कर दी है। समिति के अध्यक्ष महेश चंद्र मिश्र व उपाध्यक्ष नवीन गिरी ने रविवार को बताया कि दूकानदारों के ऊपर अत्याचारों के बारे में पीएम के संसदीय दफ्तर पर एक प्रतिनिधि मंडल ज्ञापन देगा। शनिवार को ज्ञानवापी परिसर में दुकान तोड़े जाने के विरोध में विश्वनाथ गली के व्यापारी सड़क पर उतर आए थे। धरनास्थल पर पहुंचे एएसपी ज्ञानवापी(सुरक्षा) शैलेंद्र राय ने प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की थी। इसके बाद नाराज व्यवसायी चौक थाने पहुंचे और वहां सीईओ के विरुद्ध तहरीर दी थी।