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पोकलैन की जिन्हें जानकारी नहीं, उन्हें सौंप दी रखवाली

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वाराणसी। वरुणा कॉरिडोर के निर्माण में इस्तेमाल की जा रहीं पोकलैन मशीनें उन इंजीनियरों को सौंप दी गईं, जो उसका संचालन और रखरखाव करना जानते ही नहीं हैं। अब मामला संज्ञान में आने पर शासन ने न सिर्र्फ इसे लापरवाही माना है बल्कि कार्यदायी संस्था सिंचाई विभाग के सात अभियंताओं को आरोप पत्र थमाते हुए मामले की जांच भी शुरू करा दी है। सिंचाई विभाग के शारदा नहर प्रखंड लखनऊ पांच द्वारा पांच पोकलैन मशीनें कॉरिडोर निर्माण के लिए यहां भेजी गई थीं। इनके रखरखाव की जानकारी मैकेनिकल इंजीनियरों को होती है लेकिन यहां सिविल इंजीनियरों को यह जिम्मेदारी दे दी गई। वह भी तब जब सिविल इंजीनियरों ने असमर्थता जताते हुए मैकेनिकल इंजीनियरों को ही इसका जिम्मा देने का आग्रह किया था। अब लापरवाही में आरोप पत्र थमाए जाने से सिविल इंजीनियर और मुश्किल में फंस गए हैं। जिन्हें आरोप पत्र थमाया गया है, उनमें सिंचाई विभाग बंधी प्रखंड वाराणसी के सिविल इंजीनियरिंग के चार जेई और तीन एई शामिल हैं।
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वरुणा की ड्रेजिंग के लिए पोकलैन मशीनें (एंफीबियस हाईड्रोलिक एक्सवेटर) यहां मंगाई गईं हैं। एक पोकलैन की कीमत डेढ़ से दो करोड़ रुपये है। पिछले साल जुलाई में जब ये मशीनें वाराणसी भेजी गईं तो सिविल इंजीनियरों को इसे रिसीव करने को कहा गया लेकिन उन्होंने इंकार कर दिया। उनका कहना था कि इसके रखरखाव की जानकारी मैकेनिकल इंजीनियरों को होती है, लिहाजा वे इसे अपनी निगरानी में नहीं ले सकते। तब इस पर लंबा विवाद हुआ। बात सिंचाई विभाग के लखनऊ स्थित उच्च पदस्थ अफसरों और शासन तक पहुंची। अंतत: ऊपर के दबाव में सिविल इंजीनियरों ने ही इसे रिसीव किया। सूत्रों के मुताबिक तब विभागीय उच्चाधिकारियों के साथ शासन का भी निर्देश था कि बंधी प्रखंड वाराणसी के अवर अभियंता (सिविल) इसकी देखरेख और संचालन करें। अवर अभियंता (सिविल) ने इसमें असमर्थता जताई। आठ अगस्त 2016 को इस बारे में अधिशासी अभियंता ने अधीक्षण अभियंता को पत्र लिखकर जानकारी दी और कहा कि ड्रेनों, बंधियों पर रेगुलेटर एवं स्लूस लगे हुए हैं जिसके रखरखाव के लिए यांत्रिक अवर अभियंता की आवश्यकता है। लिहाजा, अत्याधुनिक मशीनों के रखरखाव के लिए इसे बैराज यांत्रिक अनुरक्षण खंड के तहत अवर अभियंता (मैकेनिकल) को हस्तांतरित करें। बावजूद इसके पोकलैन के रखरखाव की जिम्मेदारी सिविल इंजीनियरों को ही सौंपी गई। अब मामला संज्ञान में आने पर शासन ने सिविल इंजीनियरिंग के जेई सियाराम, विजय कुमार, सुभाष सिंह, चंद्रशेखर और एई जेएन राय, जेएन मिश्रा और विनोद श्रीवास्तव को आरोप पत्र जारी किया है। इसे लेकर सिविल इंजीनियरों में खासी नाराजगी है। जल्द ही वह अपनी शिकायत शासन में लेकर जाएंगे।
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