ज्ञानपुर/सुरियावां। नोटबंदी के करीब आठ माह बाद एक बार फिर दस के सिक्के को लेकर किचकिच शुरू हो गई है। आरोप है कि पेट्रोल पंप से लेकर बैंक तक 10 रुपये के सिक्के लेने से इंकार कर रहे हैं। इससे छोटे और मझोले व्यापारियों की टेंशन बढ़ गई है, जबकि रिजर्व बैंक की ओर से दस के सिक्के को न लेने की कोई गाइडलाइन जारी नहीं की गई है।
आठ नवंबर को पांच सौ और एक हजार के नोट बंद होने के बाद करेंसी की किल्लत से पूरे देश में हाहाकार मच गया था। उस दौरान 10 के सिक्के को लेने को लेकर विवाद शुरू हुआ, हालांकि आरबीआई ने ऐसी किसी बात होने से इंकार किया तो हर जगह सिक्के लिए जाने लगे। करीब छह से सात माह बाद एक बार फिर 10 रुपये के सिक्के को लेकर किचकिच शुरू हो गई है। पेट्रोल पंप, बड़ी दूकान या बैंको में लोग 10 के सिक्के देना चाह रहे हैं, लेकिन उसे लेने से इंकार किया जा रहा है। छोटे और मझोले व्यापारी दूकानदारी कर बड़ी संख्या में 10 का सिक्का एकत्रित किए हैं। बैंकों की ओर से पैसा न लिए जाने से उनकी मुश्किलें बढ़ गई है। सुरियावां नगर के कई दूकानदारों के पास तो 10 से 20 हजार के सिक्के पड़े हैं। व्यापारी पवन, प्रीतम, रामेश्वर, जतन, रोहित, सुरेश, नन्हेलाल, सुरेंद्र ने मांग की है कि ऐसे बैंक जो 10 का सिक्का नहीं ले रहे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। पीएम को पत्र लिखकर कहा कि अविलंब निर्णय नहीं लिया गया तो छोटे और मझोले व्यापारी सड़क पर आ जाएंगे।
जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक अमिताभ सेन ने कहा कि 10 का सिक्का न लेना आरबीआई के नियमों का उल्लंघन है। जिन व्यापारियों को दिक्कत है, वह मुझसे मिल सकते हैं। अधिक मात्रा में 10 का सिक्का लाने पर मुश्किलें होती होगी।