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रिश्तों में संतुलन बनाएं, सकारात्मक सोचें

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भदोही। नगर के सनबीम स्कूल में प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के तत्वाधान में चल रहे अलविदा तनाव
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शिविर में दूसरे दिन रविवार को प्रतिभागियों ने खुश रहने का संकल्प लिया। शिविर को संबोधित करते हुए पूनम बहन ने कहा कि इस अमूल्य जीवन का एक लक्ष्य बनाओ। जो लोग लक्ष्य बनाकर अथवा किसी उद्देश्य से जीते हैं उनका जीवन सफल होता है।
पूनम बहन ने लोगों को बताया कि खुशी जैसा खजाना नहीं, खुशी जैसा खुराक नहीं और खुशी जैसी कोई दवा नहीं। जिसका मन शांत रहता है उसकी बुद्धि शांत और स्थिर रहती है। खुशी परमात्मा का उपहार है। इसे नि:शुल्क प्राप्त किया जा सकता है लेकिन खरीदना चाहोगे तो लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी नहीं मिलेगा। बताया कि मूल समस्या यह है कि अपनी खुशी दूसरों से तुलना करते हैं। सब कुछ पाने की इच्छा मत पालो। एक इच्छा पूरी होते ही दूसरी खड़ी हो जाती है। जीवन सांप-सीढ़ी का खेल है। इसमें असंतुलन होगा, अच्छा होगा, बुरा होगा, लाभ होगा, हानि होगी, स्वस्थ होंगे, बीमार होंगे। परिस्थितियों से न घबराएं क्योंकि सब दिन होत न एक समान। जान लें कि प्रतिकूल परिस्थिति है तो अनुकूल भी होनी है।
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माता-पिता के साथ बच्चे भी शिविर में पहुंचे। आयोजकों द्वारा बच्चों को गुब्बारे भेंट किए गए। पूनम बहन ने बच्चों को भी खुश रहने का मंत्र दिया। उनसे प्रतिज्ञा कराई कि मैं भगवान का बच्चा हूं। खुशी मेरा खजाना है। मुझको खुश रहना ही है। अंत में लोगों को बताया कि शरीर में धमनियां सिकुड़ने से हृदय रोग होता है। आज यदि मन से राग-द्वेष निकाल दें। दूसरों का बुरा न सोचें, चिंता छोड़ खुशी का दामन थामें, तो कोई भी रोग नहीं होगा। मेडिटेशन के माध्यम से धमनियों को साफ करने का अभ्यास के बाद दूसरे दिन का समापन हुआ।
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