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‘बिजली की बढ़ीं दरों को वापस ले सरकार’

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वाराणसी। संयुक्तव्यापार समिति काशी ने वाणिज्यिक विद्युत दरों में किए गए अप्रत्याशित वृद्धि का विरोध करते हुए कहा कि इससे प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र काशी के ही नहीं पूर्वांचल के उद्यमी और व्यापारी भी सकते में हैं। समिति से जुड़े उद्यमियों और व्यापारियों ने उद्योग-व्यापार हित में बढ़ी दरों को अविलंब वापस लेने की आवाज बुलंद की है। इसके लिए सरकार को 15 दिन की मोहलत दी गई है। मांग पूरी न होने पर संगठन ने आंदोलन की चेतावनी दी है। विभाग को बिजली चोरी रोकने पर जोर देना चाहिए।
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विनायका प्लाजा (मलदहिया) स्थित संगठन कार्यालय में मंगलवार को मीडिया से बातचीत करते हुए समिति के कोआर्डिनेटर व उद्यमी आरके चौधरी ने कहा कि पावर कारपोेरेशन की मांग पर उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने वाणिज्यिक विद्युत दरों में इतनी अधिक वृद्धि कर दी है कि पहले से संजीवनी के सहारे चल रहे व्यापार जगत के लिए यह कड़वा घूट बन गया है। यदि समय रहते इसे वापस नहीं लिया गया तो यह व्यापार जगत के लिए ऐसा नासूर बन जाएगा जिससे व्यापारी समाज कारोबार बंद कर गैर प्रांतों को पलायन करने को विवश हो जाएंगे।
वाराणसी व्यापार मंडल के अध्यक्ष अजीत सिंह बग्गा ने कहा कि शहर में जाम की विकट समस्या से व्यापार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। कोई ऐसा दिन नहीं होगा जब पीएम के संसदीय क्षेत्र के लोग जाम से जूझते न हो। इससे व्यापारी जगत भी अछूता नहीं है। काशी व्यापार प्रतिनिधि मंडल के महामंत्री राजकुमार शर्मा ने भी जाम से कारोबार चौपट होने की बात कही। महानगर उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष प्रेमनाथ मिश्रा ने कहा कि काफी समय से उद्यमी व व्यापारी समाज प्रदेश सरकार से व्यापारिक आयोग के गठन की मांग कर रहे हैं। अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के महानगर अध्यक्ष राकेश जैन ने कहा कि हर वर्ग के लिए आयोग बना है लेकिन व्यापारियों के लिए अभी तक आयोग का गठन नहीं हुआ। आईआईए के वाराणसी अध्यक्ष राजेश भाटिया ने कहा कि आयोग के गठन के पीछे व्यापारियों की मंशा सिर्फ इतनी है कि उनकी मांगों पर न्यायोचित फैसला सरकार ले सकेगी।
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