वाराणसी। ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य पद की दौड़ में त्रयंबकेश्वर चैतन्य ब्रह्मचारी का नाम सबसे आगे है। भारत धर्म महामंडल को सनातन धर्म के इस सर्वोच्च पद के लिए देश के अलग-अलग इलाकों के मठों, आश्रमों और आध्यात्मिक संस्थाओं की ओर से भेजी गईं 54 संस्तुतियां प्राप्त हुई हैं। इनमें से 25 से अधिक अभिमत त्रयंबकेश्वर चैतन्य के लिए आए हैं। इनके बाद इस पद पर हाईकोर्ट की ओर से अयोग्य ठहराए गए स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती के नाम की संस्तुतियां हैं। 20 दिसंबर के बाद भारत धर्म महामंडल की ओर से गठित स्क्रीनिंग कमेटी इन नामों पर विचार कर तीनों पीठों के शंकराचार्यों, उच्च कोटि के विद्वानों से अभिमत प्राप्त करेगी। उसके बाद शंकराचार्य के नाम की घोषणा की जाएगी।
भारत धर्म महामंडल के लहुराबीर स्थित कार्यालय में मंगलवार तक ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य पद के लिए कुल 54 संस्तुतियां प्राप्त हुईं। यह संस्तुतियां राजस्थान, वृंदावन, गुजरात, दिल्ली के अलावा देश के अन्य इलाकों की आध्यात्मिक संस्थाओं की ओर से भेजी गई हैं। इनमें 25 से अधिक संस्तुतियां त्रयंबकेश्वर चैतन्य ब्रह्मचारी के नाम की हैं। महामंडल के चीफ सेक्रेटरी प्रो. प्यारे सिंह ने बताया कि त्रयंबकेश्वर चैतन्य धर्म सम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज के शिष्य प्रबाल जी महाराज के शिष्य हैं। उन्होंने वेद, वेदांत, पुराणों के अलावा सनातनी परंपराओं का गहन अध्ययन किया गया है। इनके अलावा स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती के नाम से भी अधिक संस्तुतियां आई हैं। राम जन्मभूमि न्यास के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. राम विलास वेदांती ने भी वासुदेवानंद के नाम की संस्तुति भेजी है। लुधियाना के देवव्रताचार्य महाराज के नाम की भी कई संस्तुतियां हैं। इन्हीं नामों में से शंकराचार्य पद के लिए सहमति बनाई जाएगी।