वाराणसी। नोटबंदी के बाद डिजिटल भुगतान पर जिस तरह से जोर दिया गया, उसका असर भी दिखा। पूरे जिले में एक साल में करीब 200 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ है। डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड समेत अन्य माध्यमों से डिजिटल भुगतान का आंकड़ा करीब 30 प्रतिशत बढ़ गया है।
आठ नवंबर 2016 को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 और 1000 के नोटों के चलन पर रोक लगाने का फैसला लिया था। इसके बाद बैंकों और डाकघरों में पुराने नोट जमा करने और नए नोट हासिल करने के लिए लोगों को खूब मारामारी करनी पड़ी थी। पीएम मोदी ने उस समय लोगों से अधिक से अधिक डिजिटल लेनदेन करने का आह्वान किया था और इसकी जिम्मेदारी बैंकों को दी थी। इसके बाद बैंकों की ओर से डिजिटल लेनदेन जागरूकता के लिए बैनर-पोस्टर लगवाए गए, स्कूल-कॉलेजों में प्रतियोगिताएं और गोष्ठियां भी कराई गईं। इससे पेटीएम, डेबिट, क्रेडिट कार्ड समेत अन्य माध्यमों से डिजिटल भुगतान की तरफ लोगों का रुझान बढ़ने लगा। नोटबंदी के एक साल होने तक यह आंकड़ा 25 से 30 प्रतिशत तक पहुंचा है। पिछले महीने बनारस दौरे पर आए वित्त राज्यमंत्री शिवप्रताप शुक्ल ने बैंक अधिकारियों ये इस आंकड़े को बढ़ाने पर जोर दिया था। अग्रणी बैंक प्रबंधक रंजीत सिंह ने बताया कि एक वर्ष में करीब 200 करोड़ का डिजिटल भुगतान हुआ है। 2018 में इसे बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। आमजन को जागरूक करने और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने की हमारी कोशिश जारी है।