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हम सुधरे तो जग सुधरेगा: बाल व्यास

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वाराणसी। विख्यात कथा मर्मज्ञ बालव्यास पं. श्रीकांत शर्मा ने शुक्रवार को अहंकार के परित्याग और संस्कार के पालन का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि परमात्मा से खुद को अलग नहीं समझना चाहिए। जो खुद को ईश्वर अलग समझने की गलती करता है वह कभी सुखी नहीं रह सकता। नाटी इमली के भरत मिलाप मैदान में शिव महापुराण के प्रसंगों पर बाल व्यास की व्याख्या के रसास्वादन के लिए कथा के आखिरी दिन खचाखच भीड़ के बीच उत्सव जैसा माहौल छाया रहा। संगीतमय कथा के प्रसंगों पर लोग झूमते-थिरकते नजर आए।
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बाल व्यास ने कहा कि संसार की समस्त भोग की वस्तुओं को मनुष्य को पाना पड़ता है, लेकिन परमात्मा पाने की नहीं, जानने की चीज है। जब हम सवाल करते हैं कि ईश्वर कहां हैं या कहां मिलेंगे? तब इसमें अहंकार का बोध होता है। यह भाव हमें परमात्मा से दूर करता है। ईश्वर कब दिखेगा? यह ललक पैदा होने पर या ईश्वरी की प्राप्ति की साधना होने पर ही ईश्वर का सानिध्य प्राप्त होगा।
बाल व्यास ने कहा कि यदि हम खुद को सुधार लें तो सारा जग सुधर जाएगा। हम अपने आप को जान लें तो सबको जान लेंगे। शिवमहापुराण कथा का सार तत्व यही है। उन्होंने कहा कि दुख अहंकार से उत्पन्न होता है। मनुष्य को ईश्वर से खुद को अलग नहीं समझना चाहिए। हमें अपने ईष्ट की निंदा कभी नहीं सुननी चाहिए। ईश्वर की निंदा करने वालों को घोर नरक की प्राप्ति होती है। जब व्यक्ति कष्ट से घिरा हो तो उसे ईश्वर याद आने लगते हैं। अंतिम दिन की कथा में बाल व्यास ने द्वादश ज्योतिर्लिंग की कथा के साथ महादेव के ब्रह्मचारी स्वरूप, नटेश्वर अवतार, किरात अर्जुन अवतार, नर्तकेश्वर अवतार, उपमन्यु अवतार, शिव महिम्न स्त्रोत, शिव तांड़व स्त्रोत जैसे प्रसंगों पर विस्तार से रोशनी डाली।
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