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भदोही धमाका- एक-AZAMGARH

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ज्ञानपुर (भदोही)। मखमली कालीनों के लिए प्रसिद्ध कालीन नगरी बारूद के ढेर पर है। पिछले चार वर्षों से जिले के अलग-अलग इलाकों में चल रही अवैध पटाखा फैक्ट्रियों में हुई विस्फोट की घटनाओं ने साबित किया है कि घनी बस्तियों में निगरानी की व्यवस्था फेल है। चौरी के रोटहां में शनिवार को हुई घटना ने पुलिस और प्रशासन के सुरक्षा और निगरानी के दावों की पोल खोल दी। जिले में पटाखा बनाने और बेचने का लाइसेंस आधा दर्जन लोगों को ही मिला है, लेकिन चोरी छिपे इसका अवैध कारोबार पुराने मुहल्लों में खूब चलता है।
वर्ष 2016 में ज्ञानपुर के पुरानी बाजार में विस्फोट में चार लोग झुलस गए थे, जबकि 2017 में ज्ञानपुर में पुरानी बाजार में अवैध पटाखा बनाने वाली फैक्ट्री में विस्फोट में तीन युवक बुरी तरह से झुलस गए थे। 14 नवंबर 2017 को भदोही नगर के दरोपुर में पटाखा बनाने वाले मकान में विस्फोट होने से एक युवक की जान चली गई थी और तीन लोग जल कर घायल हो गए थे। इसी तरह 2018 में गोपीगंज कोतवाली के बैदा बाजार में एक पूरा दो मंजिला मकान विस्फोट में जमींदोज हो गया था, हालांकि विस्फोट पटाखे से हुआ या रसोई गैस सिलेंडर से, अब तक की जांच में यह स्पष्ट नहीं हो सका।
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अग्निशमन विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में छह पटाखा व्यापारियों को लाइसेंस जारी है पर भदोही, सुरियावां, घोसिया, गोपीगंज, ज्ञानपुर और चौरी, राजमार्ग किनारे की बस्तियों में इसके निर्माण और बिक्री का अवैध कारोबार खूब फल-फूल रहा है। पटाखों के निर्माण के लिए ज्ञानपुर रोड, अंजही मोहाल, फूलबाग और खड्हट्टी एवं स्टेशन रोड पड़ाव तथा भदोही नगर के घमहापुर, कटरा बाजार, सलावत खां, गजिया रेलवे क्त्रसॅसिंग, चौरी, रोटहां आदि इलाकों में बड़ी मात्रा में बारूद रखा जाता है। खास है कि अधिकतर स्थानों पर घनी बस्तियों के बीच ही बारूद रखा जाता है, जो रोटहां जैसी घटना के कारण बन जाती है।
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