वाराणसी। गंगा में नाव संचालन का लाइसेंस क्यों नहीं जारी किया जा रहा है। आखिर किस कारण से नावों के लाइसेंस की प्रक्रिया नगर निगम ने रोकी है। उक्त जानकारी सदन में एमएलसी राजपाल कश्यप ने मांगी है। इसके लिए नगर निगम से भी जवाब तलब किया गया है। निगम की ओर से इस मामले में जवाब देने के लिए नगर निगम तैयारी कर रहा है। गंगा में राजघाट से लेकर रामनगर तक कछुआ सेंचुरी के कारण नावों के संचालन पर रोक है।
नगर निगम के सदन में भी नाविकाें का मुद्दा उठा था। कई पार्षदों ने निगम कर्मियों पर मनमानी करने और धनउगाही का आरोप लगाया था और कहा कि कर्मचारियों व अधिकारियों की मिलीभगत से पुरानी रसीदों से नाविकों से वसूली की जा रही है। लाइसेंस नवीनीकरण के नाम पर भी रसीद थमा दी जा रही है। यह पैसा नगर निगम में नहीं पहुंच रहा, जिससे राजस्व को चूना लग रहा है।
महापौर मृदुला जायसवाल ने अधिकारियों से नावों की संख्या उपलब्ध कराने के लिए कहा है। नगर निगम के लाइसेंस अनुभाग के अधिकारियों का कहना है कि नाविकों ने अब नावों का स्वरूप बदल दिया है। नाव को मोटरबोट बना दिया है जिससे पानी में प्रदूषण फैल रहा है। मोटर बोट से जहां डीजल व पेट्रोल गंगा में घुल रहा है वहीं इनके चलने से ध्वनि प्रदूषण भी हो रहा है।
गंगा में संचालित यात्री जहाज (क्रूज) के अपने निर्धारित मार्ग के बजाय नाविकों के निर्धारित मार्ग पर चलने का आरोप लगाते हुए इसके विरोध में एक सप्ताह का आंदोलन किया गया था। उधर, नाविक समाज इस नई व्यवस्था से बेहद नाराज है जिसके चलते बुधवार को केंद्रीय मंत्री स्मृति जुबिन ईरानी नाविकों के बीच पहुंची थी। उनके आक्रोश को रोकने के लिए आरक्षण का राग भी अलापने की बात कही जा रही है।